कोलकाता, 12 अगस्त केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और केंद्र सरकार उनके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करती है।
केंद्र द्वारा जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के विपक्षी दलों के आरोपों के संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए, उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इन एजेंसियों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया था।
कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘जो लोग कहते हैं कि वर्तमान सरकार इन सभी संस्थानों - सीबीआई और ईडी - का उपयोग या दुरुपयोग कर रही है, वे अपनी मानसिकता के बारे में बात कर रहे हैं।’’
सिंह ने कहा, ‘‘वे संप्रग के समय की बात कर रहे हैं, जब वे खुद इसमें लिप्त थे। (जब) वे अपने फायदे के लिए, अपने राजनीतिक हित के लिए एजेंसियों में इस हद तक हस्तक्षेप कर रहे थे कि उच्चतम न्यायालय को ‘पिंजरे में बंद तोता’ जैसी टिप्पणी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
उन्होंने कहा कि ‘पिंजरे में बंद तोता’ वाली टिप्पणी तब की गई थी, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार केंद्र में थी।
भ्रष्टाचार-रोधी जी20 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के समापन के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तहत सरकार संविधान में निहित सभी मानदंडों और मूल्यों का पालन करती है। ये निकाय (सीबीआई, ईडी) स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।’’
सिंह ने कहा कि ये वही राज्य (जो अब केंद्र पर जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हैं) हैं, जिन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र में जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली है।
किसी का नाम लिए बिना केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘यदि आप 2014 से पहले से तुलना करें, तो आपको याद होगा कि सीबीआई ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय और तत्कालीन गृह मंत्री के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी। लेकिन, तब एक बार भी तत्कालीन गुजरात सरकार ने सीबीआई के लिए सामान्य सहमति वापस नहीं ली थी।’’
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