नयी दिल्ली, दो अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मोइरांगथेम आनंद सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसे म्यांमा स्थित कुछ विद्रोही समूहों के साथ कथित संबंधों और मणिपुर में जातीय अशांति का फायदा उठाकर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि उन्हें जमानत देने से उसके भागने का खतरा हो सकता है और मामले के गवाहों के प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।
पीठ ने कहा, ‘‘मणिपुर में मौजूद अस्थिर स्थिति और विरोध प्रदर्शनों समेत विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने से न केवल उसके भागने का खतरा होगा, बल्कि वर्तमान मामले में गवाहों को प्रभावित करने और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की भी आशंका होगी।’’
अदालत ने कहा कि आरोपों और अपराधों की ‘‘गंभीर’’ प्रकृति को देखते हुए आरोपी इस समय जमानत पाने का हकदार नहीं है क्योंकि इससे ‘‘सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव’’ पड़ सकता है।
अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने उसके खिलाफ प्रथमदृष्टया मामला स्थापित किया है, जो कथित अपराधों में उनकी संलिप्तता को दर्शाने वाले भौतिक साक्ष्यों पर आधारित है।
सिंह को सितंबर 2023 में मणिपुर से गिरफ्तार किया गया था और पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया था।
वह मणिपुर पुलिस द्वारा पुलिस शस्त्रागार से लूटे गए हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किये गये पांच व्यक्तियों में से एक है।
एनआईए के दावे के अनुसार, सिंह की गिरफ्तारी म्यांमा स्थित उग्रवादी समूहों द्वारा मणिपुर में मौजूदा जातीय अशांति का फायदा उठाकर भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की ‘‘अंतरराष्ट्रीय साजिश’’ के मामले में की गई है।
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