पटना, 27 जून बिहार में विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) ने राज्य विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में गहन पुनरीक्षण के प्रस्ताव का शुक्रवार को कड़ा विरोध किया।
उन्होंने इस कवायद को आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग की मदद करने के लिए एक ‘‘षड्यंत्र’’ करार दिया।
यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित अन्य नेताओं ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का विरोध किया जाएगा।
गठबंधन ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग के पास एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा और ‘‘यदि वे हमें संतुष्ट करने में असफल रहे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।’’
तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘यदि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को लेकर इतना गंभीर था, तो उसने पिछले वर्ष के लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद ऐसा क्यों नहीं किया? उसने इस सप्ताह के आरंभ तक इंतजार क्यों किया?’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में दिल्ली गए थे, जाहिर तौर पर वह विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जद (यू) की संभावनाओं के बारे में गठबंधन सहयोगियों के साथ अपनी आशंकाओं को साझा करने के लिए गए थे। हमें संदेह है कि बाद में सत्तारूढ़ गठबंधन ने निर्वाचन आयोग को कुछ ऐसा करने का निर्देश दिया, जिससे चुनावों में उसे मदद मिल सके।’’
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया, ‘‘हमें संदेह है कि इस कवायद का उद्देश्य, जिसमें मतदाताओं से ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो बहुत कम लोगों के पास हो सकते हैं, बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित करना है, विशेष रूप से दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग जैसे वंचित वर्गों को।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘एक बार जब नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, तो अगला कदम इन लोगों को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित करना हो सकता है। यह भाजपा-आरएसएस की जनविरोधी सोच के अनुरूप है, जिसे दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की वकालत करके अभिव्यक्त किया है।’’
तेजस्वी ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग के लिए सिर्फ 25 दिनों में इतनी बड़ी कवायद करना असंभव है, जैसा कि उसने प्रस्तावित किया है। अगर वास्तव में यह संभव है, तो मैं केंद्र को चुनौती देता हूं कि वह दो महीने के भीतर जाति जनगणना कराए।’’
खेड़ा ने कहा, ‘‘महात्मा गांधी के तीन बंदरों ने कुछ भी बुरा न देखा, न सुना और न कहा। इसी प्रकार निर्वाचन आयोग कुछ भी सच न देखता है, न सुनता है और न बोलता है। जब हमारे नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराने के तरीके पर संदेह जताया, तो भाजपा की ओर से इसका खंडन आया। यह रिश्ता क्या कहलाता है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाल के जनमत सर्वेक्षणों से परेशान हैं, जिनमें दिखाया गया है कि बिहार में राजग का प्रदर्शन खराब रहने वाला है। इसलिए, उन्होंने शायद निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में किया है।’’
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग के लिए बिहार एक ‘‘प्रयोगशाला’’ है और देश में अन्य जगहों पर भी इसी तरह के प्रयोग हो सकते हैं।
एक दिन पहले निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपना विरोध जताने वाले भट्टाचार्य ने दावा किया कि प्रस्तावित कवायद ‘‘तार्किक रूप से बेतुकी’’ है और यह ‘‘एक दुःस्वप्न’’ साबित होगा क्योंकि यह कवायद मानसून के दौरान की जा रही है जबकि इस दौरान राज्य के बड़े हिस्से बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
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