देश की खबरें | एफटीआईआई को वर्णान्धता पीड़ितों को फिल्म निर्माण पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने पुणे के भारतीय फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एफटीआईआई) को वर्णान्धता (कलर ब्लाइंडनेस) से पीड़ित लोगों को फिल्म निर्माण तथा संपादन से जुड़े सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति देने का मंगलवार को निर्देश देते हुए कहा कि इस मामले में अधिक समावेशी और प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि वर्णान्धता के आधार पर दाखिले के समय कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने कहा कि फिल्म निर्माण एवं संपादन, कला का एक रूप है और संस्थान को इस मामले में अधिक समावेशी तथा प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

पटना के निवासी आशुतोष कुमार ने शीर्ष अदालत में एक याचिक दायर कर बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसने एफटीआईआई में फिल्म संपादन में तीन वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिले का अनुरोध करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले मामले पर विशेषज्ञों की एक समिति का गठन भी किया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि समिति के अनुसार वर्णान्धता पीड़ितों को एफटीआईआई में सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन की अनुमति मिलनी चाहिए।

कुमार ने दाखिला ना मिल पाने पर 2016 में उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई थी।

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