देश की खबरें | दुष्कर्म पीड़िता का गर्भ गिराने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर चिकित्सीय परीक्षण कराने का निर्देश

अहमदाबाद, पांच सितंबर गुजरात उच्च न्यायालय ने वडोदरा के एक सरकारी अस्पताल को नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के लगभग 28 सप्ताह के गर्भ को गिराने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर उसके चिकित्सीय परीक्षण का निर्देश दिया है। नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप उसके पिता पर ही है।

राज्य के नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा पुलिस द्वारा कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में पीड़िता के पिता को गिरफ्तार किए जाने के दो दिन बाद पीड़िता की मां ने उसका गर्भपात कराने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया है।

न्यायमूर्ति समीर दवे ने सोमवार को दिए आदेश में वडोदरा के सर सयाजीराव गायकवाड़ सामान्य अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया है कि गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम के तहत चिकित्सकों की एक समिति बनाकर मंगलवार को पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण किया जाए और बुधवार को इसकी एक रिपोर्ट सौंपी जाए।

अदालत ने डेडियापाड़ा पुलिस थाने के निरीक्षक को पीड़िता को चिकित्सीय परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाने और ‘स्थिति को बेहद उचित तरीके से संभालने’ का भी निर्देश दिया। पीड़िता नर्मदा जिले के आदिवासी बहुल डेडियापाड़ा तालुका के एक गांव की निवासी है।

याचिकाकर्ता के वकील ने मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा था कि पीड़िता के साथ उसके पिता ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया, जिसके बाद उसकी मां ने पुलिस को शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने मामले में दो सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की।

वकील ने कहा कि पूर्व में की गई पीड़िता की चिकित्सीय जांच में पता चला है कि वह 27 या 28 सप्ताह की गर्भवती है।

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