नयी दिल्ली, 30 मई महाराष्ट्र में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा (एमपीआईडी) से जुड़ी विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा से नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लि. (एनएसईएल) मामले में पूर्व वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के चेयरमैन रमेश अभिषेक की भूमिका का जांच करने का निर्देश दिया है। एफएमसी का भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में विलय हो चुका है।
अदालत ने अभिषेक की एनएसईएल के 5,600 करोड़ रुपये के भुगतान चूक संकट में शामिल होने की जांच करने का निर्देश दिया है।
एनएसईएल ने मंगलवार को कहा कि आर्थिक अपराध शाखा, मुंबई मामले में 40 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज ने इस बात को लेकर आवेदन दिया था कि आर्थिक अपराधा शाखा (ईओडब्ल्यू) ने दिसंबर, 2022 में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया था। लेकिन उसने वायदा बाजार आयोग और रमेश अभिषेक की भूमिकाओं की जांच नहीं की थी।
एनएसईएल ने 2020 में ईओडब्ल्यू के समक्ष विस्तार से प्रतिवेदन देकर अभिषेक की तरफ से लापरवाही बरतने और विफल रहने की बात कही थी। इसके बारे में एजेंसी ने जांच नहीं की। इसको लेकर एक्सचेंज ने आवेदन दिया था।
नेशनल स्पॉट एक्सचेंज के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नीरज शर्मा ने बयान में कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि अभिषेक की भूमिका की जांच निष्पक्ष होगी और मामले में उनकी तरफ से कदम नहीं उठाने के पीछे का मकसद सामने आएगा।’’
बयान में दावा किया गया है कि संकट की वजह वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के चेयरमैन की तरफ से उपभोक्ता मामलों के विभाग को दी गयी गलत सलाह थी। उसमें कहा गया था कि एनएसईएल ने एफसीआरए (विदेशी चंदा नियमन अधिनियम) के तहत मिली छूट की कुछ शर्तों का उल्लंघन किया है।
उसके आधार पर उपभोक्ता मामलों के विभाग ने अप्रैल, 2012 में एक्सचेंज को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसका विस्तार से जवाब देने के बाद भी कारण बताओ नोटिस पर जुलाई, 2013 तक कोई निर्णय नहीं हुआ। उसी समय एक्सचेंज को अचानक से कामकाज बंद करने को कहा गया, जिससे भुगतान चूक संकट पैदा हुआ।
सरकार ने अगस्त, 2013 में एफएमसी को मामले के निपटान के लिये अधिकार दिया।
एनएसईएल ने कहा, ‘‘एफएमसी प्रमुख रमेश अभिषेक ने संकट के समाधान को लेकर कोई कदम नहीं उठाया। वास्तव में, अभिषेक के ढुलमुल रवैये के परिणामस्वरूप चूककर्ताओं ने धन की हेराफेरी की। इससे जो वास्तविक दावेदार थे, उनके पैसे लौटाने में कठिनाई हुई। वे लगभग एक दशक के बाद भी अपनी वैध राशि का इंतजार कर रहे हैं।’’
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