ह्यूस्टन, 21 जून अनुसंधानकर्ताओं ने कोरोना वायरस की स्थिरता पर पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव का पता लगा लिया है और कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौर के बाद यह वायरस अपने अनुकूल मौसम होने पर फिर से पैर पसार सकता है।
अध्ययन में कहा गया है कि मनुष्य की लार, बलगम तथा नाक के म्यूकस में इस वायरस की स्थिरता पर पर्यावरणीय स्थितियों का प्रभाव पड़ता है।
अमेरिका की मार्शल यूनिवर्सिटी से जेरेमियाह मैस्टन सहित अनुसंधानकर्ताओं ने उल्लेख किया कि नया कोरोना वायरस, सार्स-कोव-2 उच्च आर्द्रता और गर्म तापमान में कम स्थिर रहता है।
यह अध्ययन रिपोर्ट पत्रिका ‘इमर्जिंग इन्फेक्शस डिसीज सार्स-कोव-2’ में प्रकाशित हुई है।
अनुसंधानकर्ताओं ने इस बारे में पता लगाने के लिए मनुष्य की लार, बलगम और नाक के म्यूकस के नमूनों का अध्ययन किया जिन्हें सात दिन तक तीन विभिन्न तापमान और विभिन्न आर्द्रता में रखा गया।
अध्ययन में सामने आया कि विषाणु की स्थिरता पर पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव पड़ता है और यदि वर्तमान में जारी कोविड-19 महामारी का दौर खत्म हो जाता है तो यह वायरस इसके बाद भी अनुकूल पर्यावरणीय स्थितियां होने पर फिर से पैर पसार सकता है।
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