जरुरी जानकारी | उद्योग जगत ने मांग को बढ़ावा देने के लिये सरकार के प्रोत्साहन उपायों की सराहना की

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर उद्योग जगत ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर और अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर 10,000 रुपये का ब्याज मुक्त अग्रिम (कर्ज) राशि देने की घोषणा की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन उपायों से लोगों के बीच एक ‘सुखद एहसास’ होगा और मांग को गति मिलने के साथ वृद्धि में तेजी आएगी।

उद्योग मंडल सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि वित्त मंत्री की दो स्तरीय रणनीति के जरिये मांग को प्रोत्साहित करने के कदम से सरकार और उपभोक्ताओं दोनों की तरफ से व्यय में तेजी आएगी और इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

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उन्होंने कहा, ‘‘महामारी के कारण कठिन और चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहे लोगों के लिये यह कदम एक सुखद एहसास दिलाएगा।’’

फिक्की की अध्यक्ष संगीता रेड्डी ने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिये एक अनूठा और वित्तीय रूप से सूझ-बूझ वाला कदम उठाया है। खपत और निवेश मांग बढ़ाने के लिये जिन उपायों की घोषणा की गयी है, उससे वित्त वर्ष की बची अवधि में वृद्धि को नई गति मिलेगी।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘इन उपायों का एक लाख करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा और यह काफी बड़ा है।’’

पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा कि सोच-विचारक उठाये गये कदमों से व्यापार, उद्योग और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ता मांग, पूंजी व्यय को बढ़ावा मिलने के साथ आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

ईवाई के भागीदार और प्रमुख (सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र) गौरव तनेजा ने कहा, ‘‘वित्त मंत्री की 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पूंजी व्यय की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है।’’

तनेजा ने कहा, ‘‘सड़क, रक्षा, जल आपूर्ति, शहरी विकास और घरेलू उत्पादित पूंजी उपकरणों पर व्यय का व्यापक प्रभाव पड़ेगा और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा....।’’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 73,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा सोमवार को की। इसमें कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर और अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को त्योहारों के मौके पर 10,000 रुपये का ब्याज मुक्त अग्रिम राशि देना शामिल हैं।

इसके अलावा केन्द्र सरकार राज्यों को 12,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध करायेगी। कर्ज 50 साल की अवधि का होगा और यह पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिये दिया जायेगा।

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