मुंबई, 11 अप्रैल (360इंफो) वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के बीच भारत का तेजी से बढ़ता अंतरिक्ष कार्यक्रम शांति का जरिया बन सकता है।
रूस के अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन की उड़ान की 61वीं वर्षगांठ मिश्रित भावनाओं के साथ मनाई जाएगी। वह अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले दुनिया के पहले अंतरिक्ष यात्री थे। अंतरराष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस के रूप में हर साल मनाया जाने वाला 12 अप्रैल का दिन कई मायनों में इस बार अनूठा होगा।
इस समय यूक्रेन, इथियोपिया, अफगानिस्तान और म्यांमा में युद्ध जारी है, श्रीलंका एवं पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, मेडागास्कर भयंकर सूखे से परेशान है और पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोविड-19 वैश्विक महामारी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं संबंधों पर अत्यधिक दबाव बना दिया है। ऐसी बहुत कम मानवीय गतिविधियां हैं, जो हमें ऐसी विकट परिस्थितियों से बाहर निकाल सकती हैं और मानव अंतरिक्ष उड़ान ऐसा करने की क्षमता रखती है।
अंतरिक्ष यात्रा का पेशा प्रेरणा देता है। यह राष्ट्रीय सीमाओं और उन्हें अंजाम देने वाली एजेंसियों से परे है। जब तक मानव अंतरिक्ष उड़ान किसी उपनगरीय यात्रा की तरह साधारण नहीं हो जाती, तब तक यह दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती रहेगी। गागरिन की उपलब्धि का जश्न जितने जोश से रूस में मनाया जाता है, अमेरिका में भी उसे उसी उत्साह से मनाया जाता है। अश्वेत प्रशिक्षु अंतरिक्ष यात्री एडवर्ड ड्वाइट न केवल अफ्रीकी अमेरिकियों के लिए बल्कि मूल अफ्रीकी लोगों के लिए भी प्रेरणा हैं। भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भारतीयों और अमेरिकियों दोनों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
बहरहाल, अंतरिक्ष में मानवीय उपग्रहों और रॉकेट प्रक्षेपणों की बढ़ती संख्या के साथ टकराव की स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ रही है। चीन ने दिसंबर 2021 में ‘यूएन ऑफिस फॉर आउटर स्पेस अफेयर्स’ को सूचित किया था कि अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी ‘स्पेसएक्स’ द्वारा संचालित दो ‘स्टारलिंक’ उपग्रहों को अपने अंतरिक्ष स्टेशन के ‘तियानहे’ मॉड्यूल से टकराने से रोकने के लिए उसने कार्रवाई की थी।
भारत भी मानव अंतरिक्ष उड़ान भरने वाले समुदायों में प्रवेश कर रहा है। देश का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष यान गगनयान 2023 में उड़ान भरने की तैयारी कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 2030 के दशक की शुरुआत तक पृथ्वी की निचली कक्षा में एक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में उनके सहयोग को लेकर कई तरह की आशंकाएं हैं। यदि वे दोनों इस मामले में अलग होते हैं, तो उन्हें ऐसे साझेदारों की तलाश होगी जो प्रतिद्वंद्वी धड़े की मुखर आलोचना करते हों। ऐसी स्थिति में, तनाव कम करने में ऐसे तटस्थ देशों की भूमिका अहम होगी, जो किसी धड़े से संबंधित नहीं हों, लेकिन दोनों के साथ काम करते हों। तटस्थ राष्ट्र भले ही शांतिदूत नहीं होंगे, लेकिन वे संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगे।
रूस और फ्रांस दोनों ने गगनयान कार्यक्रम में भारत की बहुत सहायता की है। रूस ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की प्रशिक्षण में मदद की है और फ्रांस ने अंतरिक्ष चिकित्सा में अपनी क्षमता के साथ उसकी सहायता की है। बदले में, भारत विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से विश्वविद्यालयों और निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप को भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन में अत्याधुनिक वैज्ञानिक पेलोड में योगदान देने और अभूतपूर्व प्रयोग करने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
भारत दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, मध्य एवं पश्चिम एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकता है। इन देशों से भारत को भी लाभ मिल सकता है और उपयोगी गठजोड़ हो सकते हैं। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन साझा वैश्विक हित के लिए सामंजस्यपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रगति की पहचान बन सकता है।
भारत के कंधों पर किसी धड़े में शामिल हुए बिना सोच-विचारकर अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और मुश्किल समय में भी स्थिरता दिखाने की बड़ी जिम्मेदारी है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए दोनों धड़ों के मित्र राष्ट्रों के साथ साझेदारी कर शांति हासिल की जा सकती है।
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