देश की खबरें | छात्र कार्यकर्ताओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत की टिप्पणी पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया

नयी दिल्ली, 17 जून भारत ने छात्र कार्यकर्ताओं नताश नरवाल एवं देवांगना कालिता को जेल भेजने के मामले पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत द्वारा चिंता व्यक्त करने पर बृहस्पतिवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि वह विशेषज्ञों से कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने एवं उसके बारे में बेहतर समझ रखने की उम्मीद करता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्थिति पर विशेष दूत मैरी लावलोर ने बुधवार को ट्वीट किया था, ‘‘मैं डब्ल्यूएचआरडी नताशा नरवाल, देवांगला कालिता को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कल जमानत दिये जाने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा निर्णय को चुनौती दिये जाने के कारण उनकी रिहाई नहीं होने की परेशान करने वाली खबर सुन रही हूं।’’

उन्होंने कहा था कि वह सीएए विरोधी प्रदर्शन के मद्देनजर इन कार्यकताओं को जेल भेजे जाने को चिंताजनक मानती हैं।

इस बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि वह इस बारे में तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि मैं समझता हूं कि इसका संदर्भ वर्तमान में चल रही न्यायिक प्रक्रिया से है और हम संरा विशेष दूत से कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने और उसके बारे में बेहतर समझ रखने की उम्मीद करते हैं।’’

उल्लेखनीय है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 15 जून को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों देवांगना कालिता, नताशा नरवाल और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा को जमानत दे दी थी लेकिन निचली अदालत से उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश बृहस्पतिवार को आया। देवांगना कालिता, नताशा नरवाल और तनहा बृहस्पतिवार को तिहाड़ जेल से बाहर आ गए ।

इन्हें पिछले साल फरवरी में दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

दीपक

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