नयी दिल्ली, 10 जुलाई सीरिया द्वारा रासायनिक हथियारों के प्रयोग के मुद्दे पर पश्चिमी देशों द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर भारत ने तटस्थ रुख अपनाते हुए कहा कि इस मुद्दे को बातचीत के द्वारा सुलझाया जाना चाहिए। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि रासायनिक हथियार निषेध संगठन (ओपीसीडब्ल्यू) के हेग स्थित मुख्यालय में ‘सीरियाई अरब गणतंत्र द्वारा रासायनिक हथियार रखने और उसका प्रयोग करने’ संबंधी मसौदा प्रस्ताव पर भारत और अन्य आठ देशों- पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, सूडान, यूएई, अल्जीरिया, बांग्लादेश और केन्या ने बृहस्पतिवार को हुए मतदान में भाग नहीं लिया।
अधिकारियों ने कहा कि फ्रांस और पश्चिमी देशों द्वारा लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में कार्यकारी परिषद के 94वें सत्र में 29 मत पड़े और इस दौरान रूस, चीन और ईरान ने प्रस्ताव का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि भारत ने बीच का रास्ता अपनाते हुए न तो पश्चिमी देशों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया और न ही उन तीन देशों का पक्ष लिया जिन्होंने प्रस्ताव का विरोध किया।
यह भी पढ़े | महाराष्ट्र में कोरोना का टूटा रिकॉर्ड, एक दिन में मिले सबसे जादा 7862 मरीज, 226 संक्रमितों ने तोड़ा दम.
ओपीसीडब्ल्यू में भारत के स्थायी प्रतिनिधि वेणु राजामोनी ने कार्यकारी परिषद को बताया कि भारत ने तटस्थ रहने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उसका मानना है कि मसौदा प्रस्ताव में उल्लिखित मुद्दों को सीरिया के साथ बातचीत के जरिये सुलझाया जाना चाहिए।
मसौदा प्रस्ताव में कहा गया कि सीरिया को अपने रासायनिक हथियारों की संख्या, उत्पादन और भंडारण के ठिकानों की जानकारी देनी होगी।
प्रस्ताव के अनुसार, सीरिया को अपने रासायनिक हथियारों के जखीरे की पहले की गई घोषणा के संबंध में सभी मुद्दों को सुलझाना होगा।
राजदूत राजामोनी ने कहा कि भारत ने सदैव रासायनिक हथियारों के अप्रसार का समर्थन किया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY