देश की खबरें | इंडियाज गॉट लैटेंट मामला: शीर्ष अदालत ने रणवीर इलाहाबादिया को ‘द रणवीर शो’ के प्रसारण की अनुमति दी

नयी दिल्ली, तीन मार्च उच्चतम न्यायालय ने पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को उनके "द रणवीर शो" को प्रसारित करने की सोमवार को अनुमति दे दी, बशर्ते वह "नैतिकता और शालीनता" बनाए रखें और उसे (कार्यक्रम को) को सभी उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त बनायें।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबादिया की इस दलील पर गौर किया कि पॉडकास्ट उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत है और उनके द्वारा काम पर रखे गए लगभग 280 लोग इस शो पर निर्भर हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के अधीन कि उनके संपूर्ण पॉडकास्ट शो में शालीनता और नैतिकता के वांछित मानकों को बनाए रखा जाएगा, ताकि उसे किसी भी आयु वर्ग के दर्शक देख सकें, याचिकाकर्ता को 'द रणवीर शो' फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाती है।’’

इसलिए, अदालत ने 18 फरवरी के अपने उस आदेश में बदलाव किया जिसमें उसने इलाहाबादिया और उनके सहयोगियों पर यूट्यूब या किसी अन्य दृश्य श्रव्य मंच पर कोई भी शो प्रसारित करने पर रोक लगायी थी।

सुनवायी के दौरान पीठ ने 18 फरवरी के आदेश के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लेख लिखने वालों पर आपत्ति जतायी और कहा कि वह इस मामले से निपटने में सक्षम है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कुछ लेख लिख रहे हैं। हम जानते हैं कि उनसे कैसे निपटना है। इस देश में मौलिक अधिकार थाली में (परोस कर) नहीं मिलते। मौलिक अधिकार कर्तव्य से जुड़े हैं और जब तक वे लोग अपने कर्तव्य को नहीं समझना चाहते, तब तक हम जानते हैं कि ऐसे तत्वों से कैसे निपटना है।’’

न्यायालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मौलिक अधिकारों का लाभ उठाना चाहता है, तो देश ने इसके लिए एक गारंटी तो दी है, लेकिन वह गारंटी एक कर्तव्य के साथ आती है।

पीठ ने कहा, ‘‘तो उस गारंटी में वह कर्तव्य निभाने की गारंटी भी शामिल होगी। इसलिए हम जानते हैं कि किस तरह का... वैसे भी हम काफी आशान्वित हैं और हमें पूरा यकीन है कि उन्होंने जो किया है, उसके लिए कुछ पश्चाताप (है)।’’

इलाहाबादिया के खिलाफ कॉमेडियन समय रैना के शो "इंडियाज गॉट लैटेंट" में माता-पिता और सेक्स पर की गई टिप्पणी के लिए कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।

हालांकि, पीठ ने इलाहाबादिया पर उनके पॉडकास्ट के ऐसे किसी भी कार्यक्रम को प्रसारित करने पर रोक लगायी, जिसका उन विचाराधीन मामलों के गुण-दोष पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता हो, जिनमें वह शामिल थे।

पीठ ने कहा कि जांच में शामिल होने के बाद विदेश यात्रा के लिए उनकी प्रार्थना पर विचार किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मामलों में उनकी उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है।

पीठ ने इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से दिये गए अंतरिम संरक्षण को अगले आदेश तक बढ़ा दिया तथा उन्हें गुवाहाटी में जांच में शामिल होने को कहा।

केंद्र और महाराष्ट्र, असम एवं ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवादास्पद यूट्यूब शो ‘‘इंडियाज गॉट लैटेंट’’ पर की गई टिप्पणी न केवल अश्लील हैं, बल्कि अनुचित भी हैं। उन्होंने अदालत से कोई भी शो को प्रसारित नहीं करने की शर्त में बदलाव नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें कुछ समय के लिए चुप रहने दें।’’

पीठ ने इलाहाबादिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ से कहा कि अदालत को पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि उनके मुवक्किल कुछ पश्चाताप प्रदर्शित करेंगे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि मामले का एक आरोपी कनाडा गया था और उसने इस मामले पर बात की थी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘उनके एक सहकर्मी को लगता है कि ये युवा बहुत होशियार हैं और हम शायद पुरानी पीढ़ी के हैं और उनमें से एक कनाडा चला गया है और उसने वहां जो कुछ कहा है, वह हमें अच्छी तरह से पता है। वे नहीं जानते कि इस न्यायालय का किस तरह का अधिकार क्षेत्र है। हम इसे दिखाना नहीं चाहते क्योंकि वे युवा हैं और उम्मीद करते हैं कि वे जिम्मेदार लोगों की तरह व्यवहार करेंगे। अन्यथा हम जानते हैं कि इन लोगों से कैसे निपटना है।’’

मेहता ने कहा कि उन्हें भी उनमें से एक द्वारा की गई टिप्पणी की जानकारी है, लेकिन वे इसे अनावश्यक रूप से उछालना नहीं चाहते।

मेहता ने कहा, "वह वास्तव में व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर रहा था। वह इस अदालत में जारी कार्यवाही का मखौल उड़ा रहा था।’’

चंद्रचूड़ ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल का उस व्यक्ति की टिप्पणी से कोई संबंध नहीं है, जिसका अदालत ने उल्लेख किया है।

शीर्ष अदालत ने कार्यवाही के दायरे का भी विस्तार किया और केंद्र को सोशल मीडिया सामग्री पर एक मसौदा नियामक तंत्र के साथ आने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, "हमने सॉलिसिटर जनरल को इस तरह के नियामक तंत्र पर विचार-विमर्श करने और सुझाव देने का सुझाव दिया है जो स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति के अधिकार पर अतिक्रमण न करे, लेकिन साथ ही संविधान के अनुच्छेद 19 (4) में वर्णित ऐसे मौलिक अधिकार के मापदंडों को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रभावी भी हो।"

अदालत ने कहा कि किसी भी मसौदा नियामक तंत्र को विषय पर विधायी या न्यायिक उपाय करने से पहले सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक किया जा सकता है।

पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘समाज दर समाज नैतिक मानदंड अलग-अलग होते हैं...हमने खुद को बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार की गारंटी दी है, लेकिन ये गारंटी कुछ शर्तों के अधीन हैं। हम ऐसी कोई नियामक व्यवस्था नहीं चाहते हैं जो अंततः सेंसरशिप की ओर ले जाए।’’

इसके बाद शीर्ष अदालत ने यूट्यूबर आशीष चंचलानी की प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने की अर्जी को इलाहाबादिया की इसी तरह की याचिका के साथ सूचीबद्ध किया।

उच्चतम न्यायालय ने 18 फरवरी को रणवीर इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था और उनकी टिप्पणी को ‘अश्लील’ करार देते हुए कहा था कि उनकी ‘विकृत मानसिकता’ से समाज को शर्मिंदा होना पड़ा।

इलाहाबादिया और रैना के अलावा असम मामले में नामजद अन्य लोगों में कॉमेडियन चंचलानी, जसप्रीत सिंह और अपूर्वा मखीजा शामिल हैं।

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