नयी दिल्ली, 17 मार्च भारत की डिजिटल रोग निगरानी प्रणाली उन देशों के लिए एक मूल्यवान मॉडल पेश करती है, जो अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना चाहते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सोमवार को यह बात कही।
मंत्री ने यहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महामारी से निपटने की तैयारी पर क्वाड कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद कहा कि हाल के दिनों में उभरे और फिर से उभरने वाले स्वास्थ्य खतरों में हुए वृद्धि वैश्विक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मजबूत तैयारियों, बढ़ी हुई निगरानी और अच्छी तरह से समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तंत्र की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालीन ढांचे को मजबूत करना, स्वास्थ्य खतरों के लिए तैयारी और लचीलापन बढ़ाना, उभरती महामारियों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना, एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण को लागू करना और बहुक्षेत्रीय लेंस के माध्यम से मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य स्थिति का समाधान करना है।
वैश्विक महामारी से निपटने की तैयारियों और प्रतिक्रिया प्रयासों को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, पटेल ने कहा, ‘‘भारत ने महामारी कोष की स्थापना के लिए करीब एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया है, जिसे विशेष रूप से महामारी से लड़ने के लिए संकल्पित किया गया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने इसके सतत कामकाज का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त 1.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया है।’’
पटेल ने कहा कि भारत ने डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का नेतृत्व किया है, स्वास्थ्य पहुंच और परिणामों में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया है, और टिकाऊ एवं डेटा संचालित प्रणालियां बनाई हैं।
उन्होंने कहा कि ये प्रयास वर्तमान और भविष्य की स्वास्थ्य और जलवायु चुनौतियों से निपटने में सक्षम स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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