जरुरी जानकारी | आईसीटी शुल्क मामले में चीनी ताइपे, जापान के डब्ल्यूटीओ समिति के आग्रह का विरोध करेगा भारत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में जापान और चीनी ताइपे के विवाद निपटान समिति बनाने के आग्रह का विरोध करेगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ये दोनों देश भारत द्वारा कुछ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क लगाने के खिलाफ विवाद निपटान समिति का गठन चाहते हैं।

नयी दिल्ली, 28 जून भारत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में जापान और चीनी ताइपे के विवाद निपटान समिति बनाने के आग्रह का विरोध करेगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ये दोनों देश भारत द्वारा कुछ सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क लगाने के खिलाफ विवाद निपटान समिति का गठन चाहते हैं।

अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों का आग्रह सोमवार को जिनेवा में विवाद निपटान निकाय के सामने रखा जाएगा और ‘हम इसका विरोध’ करेंगे।

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डब्ल्यूटीओ के व्यापार विवाद नियमों के अनुसार यदि ये देश दूसरी बार समिति के गठन की मांग के साथ आते हैं, तो इस मामले में समिति बनाई जाएगी।

पिछले साल मई में दोनों देशों ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान पर भारत द्वारा आयात शुल्क लगाने के खिलाफ अपील की थी। इनमें सेल्युलर नेटवर्क के लिए टेलीफोन, स्वागत कक्ष की मशीन, वॉयस, इमेज या अन्य डाटा के पारेषण और टेलीफोन सेट के कलपुर्जे शामिल हैं।

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इन देशों का आरोप है कि इन उत्पादों पर आयात शुल्क लगाकर भारत ने डब्ल्यूटीओ नियमों का उल्लंघन किया है। भारत ने इन उत्पादों पर शून्य प्रतिशत की सीमा (बाउंट टैरिफ) की प्रतिबद्धता जताई है। भारत ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया था।

बाउंड टैरिफ या शुल्क से तात्पर्य एक सीमा से है जिसके ऊपर कोई डब्ल्यूटीओ सदस्य आयात शुल्क नहीं लगा सकता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ये आईसीटी उत्पाद डब्ल्यूटीओ के सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद (आईटीए-2) करार का हिस्सा हैं। भारत इस करार का हिस्सा नहीं है। भारत ने 1997 में आईटीए-1 करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें इन उत्पादों पर सीमा शुल्क समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है।

फरवरी और मार्च में हुई विवाद निपटान निकाय की बैठक के ब्योरे के अनुसार भारत ने कहा था कि वह पूरी तरह आईटीए-1 को लेकर प्रतिबद्ध है और बरसों से इसका अनुपालन कर रहा है।

ब्योरे के अनुसार भारत ने कहा कि उसने कभी आईटीए-1 के दायरे के बाहर जाकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। प्रौद्योगिकी में प्रगति की वह से बनने वाले उत्पाद आईटीए-1 के दायरे में नहीं आते हैं।

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