जरुरी जानकारी | भारत ने कहा, मत्स्य पालन सब्सिडी पर मौजूदा मसौदा ‘असंतुलित’

नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से कहा है कि मत्स्य पालन सब्सिडी पर मौजूदा मसौदा ‘असंतुलित’ है और इसे बातचीत के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है। अधिकारी ने कहा कि मसौदे में भारत द्वारा प्रस्तावित सुझावों को शामिल करने के बाद ही इसे बातचीत के लिए स्वीकार किया जा सकता है।

भारत समय-समय पर कहता रहा है कि वह डब्ल्यूटीओ में मत्स्य पालन सब्सिडी के करार को अंतिम रूप देने का इच्छुक है, क्योंकि कई देशों द्वारा अत्यधिक मछलियां पकड़ने और तर्कहीन लाभों से घरेलू मछुआरों की आजीविका प्रभावित हो रही है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘मौजूदा मसौदा असंतुलित है और जब इसमें भारत द्वारा प्रस्तावित सुझावों को शामिल किया जाएगा, तभी यह बातचीत के लिए संतुलित बन सकेगा। मौजूदा मसौदा बातचीत के लिए आधार नहीं बन सकता।’’

डब्ल्यूटीओ में सदस्य देश मसौदे के आधार पर वार्ता करते हैं जिसके बाद किसी करार को अंतिम रूप दिया जाता है।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत इस समझौते के खिलाफ नहीं है और न ही वह वार्ता में अड़चन डाल रहा है। भारत ने हाल में मत्स्यपालन सब्सिडी पर एक प्रस्ताव सौंपा है। यह प्रस्ताव उन देशों के अनुरूप नहीं है जो अत्यधिक मछली पकड़ रहे हैं या अत्यधिक क्षमता बना रहे हैं।

भारत ने सुझाव दिया है कि ऐसे देश जो दूर पानी में और अपने प्राकृतिक भौगोलिक क्षेत्र के बाहर मछली पकड़ रहे हैं, उन्हें अपने विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के बाहर 25 साल तक सब्सिडी देना बंद करना चाहिए। अधिकारी ने बताया कि ऐसे देश इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।

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