संयुक्त राष्ट्र, 12 जून भारत ने कोविड-19 महामारी और जलवायु परिवर्तन की ‘दोहरी मार’ से निपटने में लघु द्वीपीय विकासशील देशों (एसआईडीएस) की मदद की प्रतिबद्धता जताई है।
एसआईडीएस कैरिबियाई सागर और अटलांटिक, हिंद तथा प्रशांत महासागरों से घिरे द्वीपसमूह हैं। वे अपेक्षाकृत सुदूरवर्ती हैं, पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के लिहाज से अधिक संवेदनशील हैं और आकार में सामान्यत: छोटे हैं।
यह भी पढ़े | कश्मीर को भारत का हिस्सा दिखाने पर पाकिस्तान के PTV न्यूज ने दो पत्रकारों को किया बर्खास्त.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधित राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने इस सप्ताह एसआईडीएस के लिए साझेदारी पर संचालन समिति की राजदूतों की पहली डिजिटल बैठक में कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के प्रकोप और इससे हुए नुकसान ने दुनिया को शिथिल कर दिया है। लेकिन इसका खासतौर पर एसआईडीएस के देशों पर कई तरह से अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। एसआईडीएस के लिए कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन दोहरी मार बनकर आये हैं।’’
पर्यटन क्षेत्र पर महामारी के प्रभाव का जिक्र करते हुए तिरुमूर्ति ने कहा कि एसआईडीएस क्षेत्र के लिए यह असर और भी ज्यादा हुआ है जिनके लिए यह सेक्टर जीडीपी का करीब 30 प्रतिशत है।
यह भी पढ़े | George Floyd: जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दुनियाभर में ऐतिहासिक स्मारकों पर हुआ हमला.
उन्होंने कहा, ‘‘भारत साझेदारी के लिए तैयार खड़ा है और एसआईडीएस के साथ पहले ही साझेदारी में काम कर रहा है। हमें आपकी प्राथमिकताओं और जरूरतों की पूरी जानकारी है। हम इस परीक्षा की घड़ी में आपके साथ साझेदारी के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।’’
तिरुमूर्ति ने कोविड-19 और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने में एसआईडीएस के देशों की मदद के भारत के प्रयासों को रेखांकित किया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY