नयी दिल्ली, 29 जून भारत और फिलीपीन ने बृहस्पतिवार को द्विपक्षीय तरजीही कारोबार समझौते पर बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की तथा रक्षा सहयोग बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। यह सहमति ऐसे समय में बनी है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य आक्रामकता बढ़ रही है।
दोनों देशों ने रक्षा, नौवहन सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक संबंधों, कारोबार, कृषि, निवेश और अंतरिक्ष सहयोग सहित विविध विषयों पर विस्तृत चर्चा की तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र के देशों के रूप में महत्वपूर्ण मुद्दों पर समान विचारों की जरूरत पर बल दिया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर और फिलीपीन के विदेश मंत्री एनरिक ए मनालो ने आज यहां द्विपक्षीय सहयोग पर भारत-फिलीपीन संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक की सह अध्यक्षता की जिसमें दोनों पक्षों ने अपने संबंधों के समीक्षा आयामों पर विस्तृत चर्चा की। मनालो भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए हैं।
दोनों पक्षों ने वर्ष 2016 में संयुक्त राष्ट्र मध्यस्थता अदालत के दक्षिण चीन सागर पर दिये गए फैसले को लागू करने की जरूरत को रेखांकित किया।
गौरतलब है कि भारत और फिलीपीन के बीच रक्षा एवं सुरक्षा संबंध तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी में फिलीपीन ने भारत के साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की तीन इकाई की खरीद के लिए 37.5 करोड़ डालर का समझौता किया था।
बैठक के बाद दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपीन के स्वतंत्र एवं मुक्त हिन्द प्रशांत के साझा हित की बात को रेखांकित किया और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विवादों के शांतिपूर्ण तरीके से निस्तारण की जरूरत बतायी।
दोनों पक्षों ने दक्षिण चीन सागर पर मध्यस्थता अदालत के फैसले के अनुपालन की जरूरत भी बतायी। अदालत ने दक्षिण चीन सागर को पर फिलीपीन के दावों को लेकर मनीला के पक्ष में फैसला सुनाया था। चीन ने इस फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था।
जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ फिलीपीन के विदेश मंत्री मनालो के साथ द्विपक्षीय सहयोग पर भारत-फिलीपीन संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक की जो समग्र एवं सार्थक रही। हमारी बातचीत दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर अपने सम्पर्क को बढ़ाने और सहयोग को विस्तार देने पर केंद्रित थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे बातचीत के एजेंडे में रक्षा, नौवहन सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला आदि विषय थे। इसके साथ ही कारोबार एवं निवेश सहित हमारे बढ़ते आर्थिक संबंध, विकास सहयोग, स्वास्थ्य एवं फार्मा, पर्यटन एवं हवाई सेवाएं, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने पर्यटन एवं शिक्षा क्षेत्रों सहित लोगों के बीच सम्पर्क के महत्व पर भी ध्यान दिया।
फिलीपीन के विदेश मंत्री एनरिक मनालो ने ट्वीट किया, ‘‘ द्विपक्षीय सहयोग पर भारत-फिलीपीन संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक की सह अध्यक्षता करते हुए डा. जयशंकर से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।’’
मनालो ने कहा, ‘‘ हमारी व्यापक बातचीत ने 21वीं शताब्दी में हमारे परिवर्तनकारी गठजोड़ की पूर्ण क्षमता को हासिल करने का आधार तैयार किया है।’’
संयुक्त बयान में कहा गया है कि मनीला में रक्षा अताशे का कार्यालय खोलने सहित रक्षा क्षेत्र में सहयोग की दिशा में काम करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की गयी। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने फिलीपीन की रक्षा जरूरतों को पूरा करने, नौसेना के लिए परिसम्पत्ति की खरीद एवं प्रशिक्षण कार्यो आदि को पूरा करने के लिए भारत की रियायती रिण सुविधा की पेशकश पर विचार करने में गहरी रूचि दिखाई ।
दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द से जल्द सुधार को लेकर ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
इसमें कहा गया है कि जयशंकर और मनालो ने आपराधिक मामलों पर द्विपक्षीय साझा कानूनी सहायता पर संधि के लिए बातचीत को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।
भारत की यात्रा पर आए मनालो ने बुधवार को 42वें सप्रू हाउस व्याख्यान को संबोधित किया था । इस दौरान फिलीपीन के विदेश मंत्री ने कहा था कि उनका देश भारत के साथ ‘काफी मजबूत’ रक्षा गठजोड़ विकसित करना चाहता है और भारत से सैन्य उपकरण खरीदने को लेकर आशान्वित है।
उन्होंने कहा था कि फिलीपीन दक्षिण चीन सागर में अपने देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में चीनी मौजूदगी को बार बार चुनौती देता रहा है और आगे भी ऐसा करेगा।
मनालो ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर के लिए आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संघ) के 10 देश और चीन आचार संहिता तैयार करने में जुटे हुए हैं लेकिन वे इसके सकारात्मक परिणाम को लेकर निश्चित नहीं हैं।
ज्ञात हो कि फिलीपीन के विदेश मंत्री मनालो, जयशंकर के निमंत्रण पर भारत आए हैं। बैठक में दोनों पक्षों ने राजनीतिक, रक्षा, सुरक्षा, नौवहन सहयोग, कारोबार एवं निवेश, स्वास्थ्य एवं पर्यटन सहित द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की।
दीपक
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