नयी दिल्ली, 25 मार्च राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की सदस्य सागरिका घोष ने मंगलवार को कहा कि भारत में पेशेवर प्रसारण और पत्रकारिता की निष्पक्षता के वैश्विक मानकों को बनाए रखने वाले एक स्वतंत्र ‘‘मीडिया उद्योग निकाय’’ की तत्काल आवश्यकता है।
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पत्रकार से राजनेता बनीं सागरिका घोष ने यह भी कहा कि भारत के ‘‘विविधता और बहुलवाद में निहित जीवंत लोकतंत्र’’ को प्रदर्शित करने के लिए राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन को ‘वास्तव में विश्व स्तरीय’’ बनाया जाना चाहिए।
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की उपनेता सागरिका घोष ने कहा, ‘‘आज, पेशेवर प्रसारण और पत्रकारिता की निष्पक्षता के वैश्विक मानकों को बनाए रखने वाले एक स्वतंत्र मीडिया उद्योग निकाय की तत्काल आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि विज्ञापन-वित्तपोषित टेलीविजन समाचार का मॉडल तेजी से क्षीण हो रहा है और यही कारण है कि मीडिया अपने मूल लक्ष्य से भटक रहा है।
उन्होंने कहा कि वह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी’ (जिसे अब न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के नाम से जाना जाता है) की सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इसमें ताकत और वैधानिक शक्ति का अभाव है।
उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का जिक्र किए बिना उनकी मौत से जुड़े मामले का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘चार साल पहले समाचार चैनलों ने एक फिल्म अभिनेता के खिलाफ एक प्रेरित अभियान चलाया था। आज वह फिल्म अभिनेता निर्दोष साबित हुआ है। आज वे सभी आरोप निराधार साबित हुए हैं, लेकिन रिया चक्रवर्ती को मीडिया के जरिये जो अपमान मिला उसका हिसाब कौन देगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सवाल यह है कि समाचार मीडिया चैनलों को और अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह कैसे बनाया जा सकता है? मीडिया मालिकों को जल्द ही संसद में बुलाया जाएगा। पक्षपाती एंकर पत्रकारिता के लिए धब्बा हैं।’’
उन्होंने दूरदर्शन को ‘‘विश्व स्तरीय’’ बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘नई मीडिया तकनीकें दुनिया को छोटा कर रही हैं। विविधता और बहुलवाद में निहित एक जीवंत लोकतंत्र के रूप में भारत की अनूठी पहचान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक परिसंपत्ति है और इसे वैश्विक मंच पर पेश किए जाने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा कि यह तभी हो सकता है जब हमारा राष्ट्रीय प्रसारक दूरदर्शन वास्तव में विश्व स्तरीय बनने की आकांक्षा रखता है... । उन्होंने कहा ‘‘दूरदर्शन यह भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए उसे उच्च श्रेणी की आधुनिक सामग्री और प्रबंधन की आवश्यकता है। स्वतंत्रता के सात दशक बाद, भारत वास्तव में विश्व स्तरीय सार्वजनिक प्रसारक का हकदार है, जैसा कि 1990 के प्रसार भारती अधिनियम में परिकल्पित किया गया था।’’
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि दूरदर्शन ने ‘‘एक निजी व्यक्ति के साथ एक आकर्षक अनुबंध किया है जो टेलीविजन पर कथित तौर पर विभाजनकारी और भड़काऊ का प्रयोग करता है, तथा जो जबरन वसूली के आपराधिक आरोपों में दो बार जेल की सजा काट चुका है।’’
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