मुंबई, 24 अप्रैल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत विविधता का जश्न मनाने वाला देश है और राष्ट्रीय ध्वज पर बना चक्र वास्तव में "धर्म चक्र" है, जो समाज के सभी पहलुओं को जोड़ने वाले मूलभूत सिद्धांत को दर्शाता है।
वैद्य ने बुधवार को यहां एक कार्यक्रम में कहा, "हमारे पास अलग-अलग संस्कृतियां नहीं, बल्कि एक संस्कृति है। इसका उत्सव विविधतापूर्ण है।"
उन्होंने यह भी कहा कि 'धर्म' और ‘पंथ’ (रिलीजन) का मतलब एक जैसा नहीं है।
संघ के नेता ने कहा, ‘‘तिरंगे पर बना चक्र वास्तव में ‘धर्म चक्र’ है। तिरंगा, उच्चतम न्यायालय, लोकसभा और राज्यसभा, सभी धर्म शब्द का इस्तेमाल करते हैं। इसके पीछे कोई कारण होना चाहिए। धर्म और पंथ एक नहीं है।’’
वैद्य ने कहा, ‘‘समाज में कई व्यवस्थाएं इसके नियमों के अनुसार काम करती हैं, यही वजह है कि समाज 'धर्माधिष्ठित' (धर्म पर आधारित) समाज है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि यह ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द कहां से आया है।’’
उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय में बहिष्कार के लिए कोई शब्द नहीं है, क्योंकि "हम किसी को बहिष्कृत नहीं करते हैं।"
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