नयी दिल्ली, एक अप्रैल विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को कहा कि भारत और चीन ने पिछले पांच महीनों में अपने संबंधों को सुधारने के लिए ‘‘आशाजनक’’ शुरुआत की है तथा संबंधों के पुनर्निर्माण का ‘‘टिकाऊ आधार’’ आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के त्रिस्तरीय फॉर्मूले पर टिका है।
उन्होंने कहा कि विश्व के एक महत्वपूर्ण भाग में दो बड़े पड़ोसी देशों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर द्विपक्षीय संबंध समग्र मानवता के लिए योगदान देगा।
विदेश सचिव दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर चीनी दूतावास द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में आए गंभीर तनाव के बाद यह पहली बार था जब किसी उच्चस्तरीय भारतीय अधिकारी ने चीनी दूतावास द्वारा आयोजित किसी कार्यक्रम में भाग लिया है।
दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने मंगलवार को द्विपक्षीय संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर संदेशों का आदान-प्रदान भी किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत-चीन संबंधों का विकास एक स्थिर और बहुध्रुवीय विश्व के लिए अनुकूल है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी यही भावना व्यक्त की।
इस कार्यक्रम में मिस्री ने कहा, ‘‘आगे का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन हम इस पर चलने के लिए तैयार हैं। पिछले पांच महीनों में हमने जो कदम उठाए हैं, उनके आधार पर ही हमने आशाजनक शुरुआत देखी है, जिसे हमें अपने दोनों देशों के लोगों के लिए ठोस लाभ में बदलना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह आज के उत्सव को भविष्य के लिए और भी अधिक सार्थक बना देगा।’’
विदेश सचिव ने कहा कि संबंधों के पुनर्निर्माण के लिए एक ‘टिकाऊ आधार’ ‘आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के त्रिस्तरीय फॉर्मूले’ पर टिका होना चाहिए।
मिस्री ने कहा कि समग्र द्विपक्षीय संबंधों के सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता महत्वपूर्ण है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY