जयपुर, तीन मार्च भारत ने संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग (सर्कुलर) वाली अर्थव्यवस्था को अपनाने के काम में तेजी लाने के लिए वैश्विक मंच की वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि एक नया वैश्विक मंच (प्लेटफार्म) होना चाहिए जो शहरों, शिक्षाविदों और तकनीकी नवोन्मेषकों को जोड़कर ऐसी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि ‘सिटीज कॉलेशन फोर सर्कुलेरिटी’ (सी3) मंच उस जयपुर घोषणा की भावना के अनुरूप हो सकता है जिसे सोमवार को शुरू हुए एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 12वें क्षेत्रीय थ्री आर और सर्कुलर इकनॉमी फोरम के समापन दिवस पर अपनाया जाएगा।
खट्टर ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी मौजूद थे।
खट्टर ने कार्यक्रम में कहा, ‘‘आज इस मंच से भारत एक वैश्विक गठजोड़ का प्रस्ताव करता है जो शहर, अकादमिक और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों को जोड़ कर सर्कुलर अर्थव्यवस्था को गति देगा।' उन्होंने कहा,‘‘मैं सभी को इस पहल पर चर्चा और सहयोग के लिए आमंत्रित करता हूं जिससे भागीदारी मजबूत होगी और प्रभावी समाधान सामने आएंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए मैं एक नये मंच का प्रस्ताव रखता हूं और वह है सिटीज कोलिशन फोर सर्क्युलरिटी (सी3) . अभी हम थ्री आर (रेडयुज, रियूज, रिसाइकल) पर काम कर रहे हैं अब हम सी3 पर काम करेंगे जो ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और सर्वोत्तम व्यवहार को साझा करने के लिए एक बहु-हितधारक, बहु-राष्ट्रीय गठबंधन है। यह ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ की भावना के अनुरूप होगा।'
खट्टर ने प्रतिभागियों से शहरों और अन्य हितधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रस्तावित मंच को बेहतर बनाने के तरीके पर चर्चा करने का आग्रह किया।
खट्टर ने कहा, ‘भारत सी3 को एक प्रमुख डिजिटल मंच के रूप में प्रस्तुत करेगा जो शहरों के बीच सहयोग, तकनीकी संस्थानों, साझेदारी और ऐसी पहल को बढ़ावा देगा। यह प्रस्तावित किया जाता है कि इच्छुक स्वैच्छिक सदस्य राष्ट्रों का एक कार्यसमूह गठित किया जाए जो गठबंधन के ढांचे व कामकाजी सिद्धांतों को अंतिम रूप देगा।’’
उन्होंने कहा कि उद्योग, अकादमिक क्षेत्र और नीति निर्माताओं के समर्थन से यह मंच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संसाधन दक्षता और कम कार्बन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक के रूप में उभरेगा। खट्टर ने यह भी कहा कि 3आर सर्कुलर अर्थव्यवस्था न केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी के लिए बल्कि सतत विकास के लिए भी आवश्यकता बन गई है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि एवं प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग वाली अर्थव्यवस्था अत्यंत प्रभावी माध्यम है। इस व्यवस्था में अपशिष्ट का पुनर्चक्रण और पुन: इस्तेमाल किया जाता है जिससे ऊर्जा की खपत घटती है और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार भी इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाकर मिशन में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण प्रबंधन केंद्र की स्थापना की गई है, ताकि कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रमण को ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सके। मुख्यमंत्री सद्भावना केंद्रों के जरिये नागरिकों को अनुपयोगी वस्तुओं के दान और पुनरुपयोग की सुविधा दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राजस्थान में कचरा प्रसंस्करण की क्षमता को 21 लाख टन से बढ़ाकर इसके दोगुने से भी ज्यादा यानी करीब 45 लाख टन करने का लक्ष्य रखा है।
इस तीन दिवसीय फोरम में नीति निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और एशिया-प्रशांत देशों के अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि सहित 1,000 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
पृथ्वी कुंज
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY