देश की खबरें | मणिपुर के कांगपोकपी में राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनिश्चितकाल के लिए नाकेबंदी दोबारा शुरू

इंफाल, 21 अगस्त मणिपुर के एक आदिवासी संगठन ने राज्य के पहाड़ी इलाकों में निवास करने वाले कुकी- जो समुदायों के लिए आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को कांगपोकपी जिले में दो राजमार्गों पर अनिश्चितकाल के लिए नाकेबंदी पुन: शुरू कर दी।

कमिटी ऑफ ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) सदर हिल्स कांगपोकपी ने नगालैंड के दीमापुर से इंफाल को जोड़ने वाली सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 (एनएच-2) और असम के सिलचर को इंफाल से जोड़ने वाली सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 37 (एनएच-37) को बाधित कर दिया है।

एक अधिकारी ने बताया, ‘‘आदिवासी संगठन के स्वयंसेवकों को सड़क बाधित करने के आह्वान पर अमल कराने और वाहनों को रोकने के लिए कांगपोकपी जिले के कुछ स्थानों पर सड़कों पर आते देखा गया है।’’

सीओटीयू सचिव लाम्मिनलुन सिंगसित ने 17 अगस्त को कहा था, ‘‘अगर राज्य के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समुदायों के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाएगी तो एनएच-2 (इंफाल-दीमापुर) और एनएच-37 (इंफाल सिलचर) पर दोबारा नाकेबंदी कर दी जाएगी। ’’

इस बीच, मणिपुर पुलिस ने रविवार को कहा कि आवश्यक वस्तुओं से भरे 163 वाहनों की एनएच-2 पर आवाजाही सुनिश्चित की गई है।

पुलिस ने कहा, ‘‘प्रदर्शन के सभी संभावित स्थानों पर सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा काफिला मुहैया कराया गया है ताकि वाहनों की मुक्त और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।’’

एक अन्य आदिवासी संगठन कुकी जो डिफेंस फोर्स ने भी चेतावनी दी है कि अगर कुकी-जो जनजाति की बसावट वाले इलाके में आवश्यक सामग्री एवं दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो वह 26 अगस्त से सड़कों को बाधित कर देगा।

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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