जरुरी जानकारी | विदेशों में मजबूती के बीच मांग बढ़ने से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी रहने के बीच घरेलू बाजार में खाद्यतेलों की मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सभी तेल-तिलहनों के दाम सुधार के साथ बंद हुए। इस सुधार के कारण सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ।
नयी दिल्ली, 10 मई विदेशी बाजारों में तेजी रहने के बीच घरेलू बाजार में खाद्यतेलों की मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सभी तेल-तिलहनों के दाम सुधार के साथ बंद हुए। इस सुधार के कारण सरसों, मूंगफली एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल तथा बिनौला तेल के दाम में सुधार दर्ज हुआ।
कल रात शिकागो एक्सचेंज मजबूत बंद हुआ था। इसके अलावा खाद्यतेलों की भी मांग बढ़ी है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि इस बार सरसों की आवक में आश्चर्यजनक कमी देखी जा रही है। नेफेड, हाफेड जैसी संस्थायें भी अभी तक सरसों की पर्याप्त खरीद नहीं कर पाई है क्योंकि सामान्य वर्षो में अप्रैल-मई के महीने में सरसों की लगभग 10-12 लाख बोरी की आवक होती थी उसके मुकाबले आवक इस बार काफी कम है जबकि उत्पादन पर्याप्त हुआ है। शनिवार को सरसों की आवक लगभग 3.25 लाख बोरी की रही जो आवक का स्तर ‘आफसीजन’ में देखने को मिलता है।
नेफेड को भी अब सरसों की खरीद करने में मुश्किल होगी क्योंकि अब सरसों के दाम 5,950 रुपये क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 100-125 रुपये क्विंटल अधिक हो गया है। यही दाम हाजिर बाजार में खुले में बगैर कंडीशन वाले और बगैर अन्य खर्चो के 6,050-6,100 रुपये क्विंटल है।
उन्होंने कहा कि बाकी खाद्यतेलों की तरह मूंगफली तेल के दाम में भी सुधार आया है। मूंगफली और सोयाबीन दोनों के ही दाम एमएसपी से नीचे हैं और सरकार के पास इसका पर्याप्त स्टॉक है। सरकार को केवल खुदरा बाजार को विनियमित करना होगा जहां मूंगफली का दाम अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की आड़ में ऊंचा बनाये रखा गया है जबकि खुदरा में दाम एमएसपी से काफी नीचे (लगभग 15 प्रतिशत नीचे) हैं। सोयाबीन का भी दाम एमएसपी से लगभग 10 प्रतिशत नीचे है। सरकार सोयाबीन, मूंगफली की बिक्री रोक दे तो इसके दाम सुधरेंगे था बिक्री जारी रही तो दाम पर दवाब बना रहेगा।
सूत्रों ने कहा कि सीपीओ का आयात अब सस्ता हो गया है। स्थानीय मांग बढ़ने से सीपीओ, पामोलीन के दाम में सुधार आया। अब धीरे-धीरे इसका उत्पादन बढ़ेगा। दाम सस्ता होने पर इसकी मांग बढ़ेगी। बिनौले की उपलब्धता कम है और मांग होने से इसमें भी सुधार आया।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 6,460-6,560 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 5,750-6,125 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,100 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,250-2,550 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,725 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,435-2,535 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,435-2,560 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,550 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 11,800 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 12,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,550-4,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,300-4,350 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 10, 2025 07:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

