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कोविड-19 से उबरने के बाद की दुनिया में हमें वैश्वीकरण की नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी: नरेंद्र मोदी

उन्होंने कहा कि आज पारदर्शिता, समानता और मानवता पर आधारित वैश्वीकरण की एक नई व्यवस्था की आवश्यकता है।

कोविड-19 से उबरने के बाद की दुनिया में हमें वैश्वीकरण की नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी: नरेंद्र मोदी
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नयी दिल्ली, चार मई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये गुट निरपेक्ष देशों के नेताओं से बातचीत में कहा कि कोरोना वायरस संकट ने विश्व को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की सीमाओं से परिचित करा दिया है।

उन्होंने कहा कि आज पारदर्शिता, समानता और मानवता पर आधारित वैश्वीकरण की एक नई व्यवस्था की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवता पिछले कई दशकों के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है और गुट निरपेक्ष आंदोलन (नैम) के सदस्य देश वैश्विक एकजुटता को प्रोत्साहित करने में सहायता कर सकते हैं क्योंकि वे विश्व की सबसे नैतिक आवाज हैं।

उन्होंने कहा, “इस भूमिका को निभाने के लिए गुट निरपेक्ष देशों को समावेशी रहना होगा।”

किसी देश का नाम लिए बिना मोदी ने कहा, “आज जहां विश्व कोविड-19 से मुकाबला कर रहा है वहीं कुछ लोग दूसरे तरह के घातक विषाणु फैलाने में लगे हुए हैं। जैसे कि आतंकवाद। जैसे कि फर्जी खबरें और समुदायों और देशों को बांटने के लिए छेड़छाड़ कर तैयार किये गए वीडियो।”

मोदी ने कहा कि महामारी से मुकाबला करने के दौरान भारत ने यह दिखाया है कि लोकतंत्र, अनुशासन और निर्णायक क्षमता किस प्रकार एक साथ मिलकर सच्चे जनांदोलन का रूप ले लेते हैं।

उन्होंने कहा कि मानवता एक बड़े संकट के दौर से गुजर रही है और इससे मुकाबला करने में गुट निरपेक्ष देश योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा, “मानवता कई दशकों के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। इस समय गुट निरपेक्ष देश वैश्विक एकजुटता को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकते हैं। गुट निरपेक्ष देश हमेशा विश्व का नैतिक स्वर रहे हैं और इस भूमिका को निभाने के लिए गुट निरपेक्ष देशों को समावेशी रहना होगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संकट को देखते हुए घरेलू जरूरतों के बावजूद भारत ने करीब 120 देशों को दवा की आपूर्ति की जिनमें 59 गुट निरपेक्ष देश शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उबरने के बाद दुनिया को वैश्वीकरण की एक नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, “कोविड-19 ने हमें वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सीमाओं से परिचित कराया है। कोविड-19 से उबरने के बाद के विश्व में हमें पारदर्शिता, समानता और मानवता पर आधारित वैश्वीकरण की नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी।”

उन्होंने कहा, “हमें ऐसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की आवश्यकता है जो आज के विश्व का बेहतर ढंग से प्रतिनिधित्व कर सकें। हमें केवल आर्थिक उन्नति ही नहीं बल्कि मानव कल्याण को भी प्रोत्साहित करना है। भारत ने लंबे समय तक इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है।”

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(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2020 11:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).