चंडीगढ़/होशियारपुर, एक दिसंबर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को गन्ने की कीमत में 11 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस वृद्धि के साथ 391 रुपये प्रति क्विंटल की नई दर देश में सबसे अधिक है।
हालांकि, किसानों ने कहा कि गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी ‘बहुत कम’ है और राज्य सरकार के कदम को ‘विश्वासघात’ करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कुछ दिन पहले ही किसानों को आश्वासन दिया था कि उनके लिए ‘अच्छी खबर’ आने वाली है।
मान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘11 रुपये की बढ़ोतरी के साथ नई दर 391 रुपये प्रति क्विंटल होगी, जो देश में सबसे अधिक है।’’
सरकारी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मान ने कहा कि उन्होंने किसानों के साथ हालिया बैठक के दौरान जो वादा किया था, उसे पूरा किया है।
उल्लेखनीय है कि किसानों ने हाल में गन्ने का दाम 380 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू- दोआबा) के अध्यक्ष मंजीत सिंह राय ने कहा कि बढ़ोतरी बहुत कम है।
राय ने कहा, ‘‘ कीमत में बढ़ोतरी बहुत कम है। यह किसानों के साथ विश्वासघात है। हम कीमत बढ़ोतरी से खुश नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि गन्ने की कीमतें ‘जितना हमसे वादा किया गया था’ उतनी बढ़ाई जानी चाहिए।
राय ने कहा, ‘‘ पिछले हफ्ते चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ हमारी बैठक में उन्होंने कहा था कि हरियाणा ने हाल ही में गन्ने की कीमतों में 14 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है और आश्वासन दिया था कि पंजाब की कीमत में 14 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की बढ़ोतरी होगी। इसलिए उम्मीद कर रहे थे कि नई दर कम से कम 400 रुपये (प्रति क्विंटल) से अधिक होगी।’’
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने ‘वादे के मुताबिक’ गन्ने की कीमतें नहीं बढ़ाई तो किसान फिर से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने राज्य में चीनी मिलों को तुरंत चालू किए जाने की भी मांग की।
इस बीच, गुरनाम सिंह के नेतृत्व में दोआबा क्षेत्र के विभिन्न किसान संगठनों के सदस्यों ने होशियारपुर से करीब 65 किलोमीटर दूर मुकेरियां चीनी मिल के पास दुगरी चौक पर धरना दिया और यातायात अवरुद्ध कर दिया।
सिंह ने कहा कि राज्य में चीनी मिलों के ‘नहीं चलने’ और गन्ने की कीमतों में ‘मामूली बढ़ोतरी’ के कारण यह विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
दोपहर को प्रदर्शनकारी शुगर मिल मुकेरियां के सामने एकत्र हुए और धरना दिया। बाद में वे दुगरी चौक चले गए और सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रेलर खड़े कर दिए और यातायात अवरुद्ध कर दिया।
सिंह ने कहा कि मुकेरियां क्षेत्र के किसान जिन्हें इस साल बरसात के मौसम में बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ था, अब भी फसलों सहित अपनी क्षतिग्रस्त संपत्ति के लिए मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ में उनकी गन्ने की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं थी।
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