गुवाहाटी, एक जनवरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने रविवार को कहा कि भविष्य में परिसीमन के लिए जनसंख्या के अलावा अन्य मानदंडों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
शर्मा ने विस्तृत ब्योरा दिये बिना कहा कि असम में 2001 की जनगणना के आधार पर संसदीय और विधानसभा सीटों का परिसीमन का काम होना है, क्योंकि ऐसा अन्य राज्यों के लिए किया गया था, लेकिन भविष्य में अन्य मानदंडों को शामिल करने के लिए संसद में बहस होनी चाहिए।
राज्य में अंतिम परिसीमन 1971 की जनगणना के आधार पर 1976 में किया गया था।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मौजूदा कानून के अनुसार, जनसंख्या परिसीमन का आधार है, लेकिन कुछ समुदायों ने जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन किया है, जबकि कुछ ने नहीं किया है। जिन्होंने नीति का उल्लंघन किया है, उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है और इसका पालन करने वालों को दंडित किया जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि अगले परिसीमन के लिए संसद इस बात पर बहस करेगी कि क्या जनसंख्या नियंत्रण नीति का पालन करने वाले लोगों को दंडित किया जाना चाहिए या पुरस्कृत।’’
शर्मा ने कहा कि उनकी राय में परिसीमन के लिए जनसंख्या ही एकमात्र मानदंड नहीं होना चाहिए और अन्य कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया कि किन अन्य मानदंडों पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) की कवायद के दौरान यह देखा गया कि राज्य में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है, ‘‘लेकिन इसकी सीमा 2021 की जनगणना के रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद ही पता चलेगी।’’
निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए एक मसौदा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे आम जनता से सुझावों और आपत्तियों को आमंत्रित करते हुए केंद्रीय और राज्य के राजपत्रों में प्रकाशित किया जाएगा।
वर्ष 2024 में अगले आम चुनाव से पहले परिसीमन की कवायद पूरी होने की उम्मीद है।
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