जरुरी जानकारी | सीपीओ में सुधार, बाकी खाद्य तेल-तिलहन के भाव स्थिर

नयी दिल्ली, 12 जुलाई विदेशी बाजारों में सुधार के रुख के बीच बुधवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में कच्चे पामतेल (सीपीओ) की कीमतों में तेजी को छोड़कर बाकी सभी तेल-तिलहनों के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।

मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में एक - एक प्रतिशत का सुधार है। बेकरी कंपनियों की मांग के कारण सीपीओ में सुधार आया जबकि दबाव होने के बावजूद विदेशों में सुधार के रुख की वजह से बाकी तेल-तिलहन पूर्वस्तर पर बने रहे।

सूत्रों ने बताया कि कई तेल संगठनों की मांग रहती है कि तिलहन किसानों के फायदे के लिए वायदा कारोबार को खोला जाना चाहिये। लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखें तो कपास की बुवाई के समय एनसीडीईएक्स में बिनौला खली का भाव पिछले दो महीने पहले के 2,975 रुपये क्विंटल के मुकाबले घटाकर जुलाई अनुबंध का भाव 2,375 रुपये क्विंटल कर दिया गया है। बिनौला खली का 2,975 रुपये का भाव तब था जब बाजार में आवक 1,55,000 गांठ की थी और अब जब आवक घटकर 25-30 हजार गांठ रह गई है, तो दाम भी घटकर 2,375 रुपये रह गया है। यानी भाव में दो माह में लगभग 24 प्रतिशत की कमी आ गयी है जबकि आवक घटने के बाद दाम बढ़ना चाहिये।

कपास की फसल आने में तीन-चार महीने का समय है। इस फसल से तिलहन उद्योग, कपड़ा उद्योग, दूध उद्योग का गहरा नाता है। कपास कपड़ा मिलों की जरूरतों को पूरा करता है। कपास से निकलने वाले बिनौला से तेल और बिनौला खल लगभग 60 प्रतिशत की मात्रा में निकलता है जिसका इस्तेमाल मवेशियों के आहार में होता है यानी दूध का व्यवसाय भी इससे जुड़ा है।

सूत्रों ने कहा कि बिजाई के दौरान बिनौला खली के दाम में गिरावट से बिजाई प्रभावित हो सकती है जो मौजूदा रकबे में कमी से जाहिर होता है। बिनौले का स्टॉक लगभग 27-28 हजार टन ही है जबकि इसके सौदे अगस्त तक के लिए 73 हजार टन के लिए किये गये हैं। इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि कहीं सट्टेबाजी के कारण यह स्थिति तो नहीं बनी है ? इस पूरी स्थिति की निगरानी की जरूरत है क्योंकि जब स्टॉक ही नहीं है तो 73 हजार टन के सौदे की मांग आई तो उसे कहां से पूरा किया जायेगा ?

इस बार कपास खेती के रकबे में गिरावट को देखते हुए सट्टेबाजों ने बिनौला खली के दिसंबर अनुबंध का भाव सस्ता करने की जगह चार प्रतिशत बढ़ाकर 2,485 रुपये क्विंटल कर दिया है। अकेले महाराष्ट्र में ही कपास खेती का रकबा घटकर 28,11,255 हेक्टेयर रह गया है।

सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन के संबंध में मौजूदा नीतियां इसके कारोबार को नुकसान पहुंचाएंगी।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,400-5,450 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,000-7,050 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 17,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,490-2,765 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,750 -1,830 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,750 -1,860 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,200 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,030-5,125 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,795-4,890 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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