नयी दिल्ली,21 फरवरी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी),मंडी के शोधार्थियों ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ और ‘मशीन लर्निंग’ का उपयोग कर एक नयी पद्धति विकसित की है, जो भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान की सटीकता को बेहतर कर सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, विकसित की गई पद्धति किसी इलाके में भूस्खलन होने की संभावना से जुड़े आंकड़ों में असंतुलन की चुनौती से निपट सकती है।
यह अध्ययन हाल में ‘लैंडस्लाइड्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि विकसित पद्धति की जांच की गई है और इसे बाढ़, हिमस्खलन, प्रतिकूल मौसमी घटनाओं पर लागू कर खतरे का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
भूस्खलन, पर्वतीय इलाकों में अक्सर होने वाली एक प्राकृतिक आपदा है, जिसमें जानमाल को काफी नुकसान होता है।
आईआईटी मंडी में स्कूल ऑफ सिविल एंड इन्वायरोन्मेंटल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डी पी शुक्ला ने बताया, ‘‘इन खतरों का आकलन करने और इनसे पैदा होने वाले जोखिम को कम करने के लिए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान करना जरूरी है।’’
उन्होंने कहा,‘‘भूस्खलन संभावना मापन (पद्धति) ढलान, ऊंचाई, भूगर्भीय संरचना, मिट्टी के प्रकार, भ्रंश रेखा से दूरी आदि के आधार पर एक खास क्षेत्र में भूस्खलन होने की संभावना का संकेत देता है।’’
उन्होंने कहा कि भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल का महत्व बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह इस गणित पर आधारित है, जो डेटा का विश्लेषण कर सकता है, पद्धतियों की पहचान कर सकता है और मानव की तरह पूर्वानुमान कर सकता है। हालांकि, मशीन लर्निंग को सटीक पूर्वानुमान के लिए बड़ी संख्या में डेटा की आवश्यकता होती है।’’
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