विदेश की खबरें | अपशिष्ट जल समुद्र में छोड़ने से पहले फुकुशिमा परमाणु संयंत्र का दौरा करेंगे आईएईए के प्रमुख
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

एजेंसी ने उपचारित रेडियोधर्मी जल को समुद्र में छोड़ने की विवादास्पद योजना से किसी तरह का नुकसान न होने की पुष्टि की है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी अपनी चार दिवसीय जापान यात्रा के तहत कई मेयर तथा मछली पकड़ने वाले संघ के नेताओं की चिंताओं को सुनने और उन्हें योजना की सुरक्षा का आश्वासन देने के लिए सरकार और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

आईएईए ने मंगलवार को जारी अंतिम रिपोर्ट में अपशिष्ट जल छोड़ने की योजना पर अपना निष्कर्ष पेश किया। इसमें कहा गया कि जल को काफी हद तक उपचारित करने की कोशिश की गई लेकिन इसमें अब भी कुछ रेडियोधर्मिता हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और इसका पर्यावरण तथा स्वास्थ्य पर प्रभाव नगण्य होगा।

स्थानीय मछली पकड़ने वाले संगठन इस योजना के खिलाफ हैं, क्योंकि उन्हें चिंता है कि भले ही इससे जल दूषित न हो लेकिन उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।

दक्षिण कोरिया, चीन और कुछ प्रशांत द्वीप राष्ट्र भी सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं।

ग्रॉसी ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आईएईए जल छोड़ने की प्रक्रिया की निगरानी एवं आकलन करना जारी रखेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पारदर्शिता में विश्वास करता हूं। मैं स्पष्ट बातचीत में विश्वास करता हूं और हम जो कर रहे हैं उसके वैध होने में विश्वास करता हूं।’’

ग्रॉसी ने कहा कि रिपोर्ट एक ‘‘व्यापक, तटस्थ व वैज्ञानिक मूल्यांकन’’ पर आधारित है। हम इसको लेकर आश्वस्त हैं।’’

जापान ने योजना के लिए विश्वसनीयता हासिल करने के वास्ते आईएईए से समर्थन मांगा था और आश्वासन दिया था कि उसके सुरक्षा उपाय अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत हैं।

आईएईए अधिकारियों ने 2022 की शुरुआत से जापान की कई यात्राएं की हैं, हालांकि यह लगातार यह स्पष्ट किया है कि वह अपशिष्ट जल छोड़ने को रोकने सहित जापान की सरकार के लिए फैसला नहीं ले सकता है।

जापान की सरकार ने अप्रैल 2021 में अपनी इस योजना का ऐलान किया था कि उपचारित लेकिन थोड़ी मात्रा में रेडियोधर्मी युक्त पानी को समुद्र में छोड़ा जाएगा। 11 मार्च 2011 में भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा दाइची संयंत्र की ‘कूलिंग प्रणाली’ को तबाह कर दिया था जिससे तीन रिएक्टर पिघल गए थे और बड़ी मात्रा में रेडिएशन का रिसाव हुआ था। जल करीब 1,000 टैंक में एकत्रित, उपचारित व संग्रहीत किया गया है।

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