नयी दिल्ली, 19 मार्च रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि ‘हाइपरलूप’ परिवहन की एक उभरती हुई तकनीक है और देश में यह विकास के शुरुआती चरण में है।
वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘दुनिया भर में हाइपरलूप के तकनीकी और सुरक्षा मानकों को अभी तक तैयार नहीं किया गया है।’’
हाइपरलूप ट्रेन चुंबकीय शक्ति पर आधारित तकनीक है जिसके तहत खंभों पर पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाती है।
रेल मंत्री ने हवाई गतिशीलता समाधानों के अनुसंधान और विकास के संबंध में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दिया।
दुबे ने प्रस्तावित 11.5 किलोमीटर लंबे ‘हाइपरलूप ट्रैक’ के पूरा होने की अनुमानित समयसीमा और अन्य चीजों के अलावा गति, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय प्रभाव के संदर्भ में हाइपरलूप तकनीक के अपेक्षित लाभों के बारे में सवाल किया था।
वैष्णव ने कहा, ‘‘हाइपरलूप अन्य परिवहन साधनों की तुलना में तेज, अधिक ऊर्जा दक्ष और टिकाऊ होने की उम्मीद है। एक पहल के रूप में, रेल मंत्रालय के तहत एक इकाई, अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) ने हाइपरलूप प्रौद्योगिकी के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए 20.89 करोड़ रुपये के वित्त पोषण के साथ आईआईटी-मद्रास के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY