श्रीनगर, पांच मार्च हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने 13 जुलाई 1931 के ‘‘शहीदों’’ के खिलाफ ‘‘अपमानजनक’’ टिप्पणी करने के लिए बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुनील शर्मा पर निशाना साधा।
महाराजा हरि सिंह के खिलाफ विद्रोह के दौरान 13 जुलाई 1931 को डोगरा सेना के सैनिकों ने 20 से अधिक निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला था।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने बुधवार को सदन में 1931 के ‘‘शहीदों’’ के बारे में कुछ ‘‘आपत्तिजनक’’ टिप्पणियां कीं। बाद में विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने इन टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया।
मीरवाइज ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा, ‘‘विधानसभा में भाजपा सदस्य द्वारा 13 जुलाई, 1931 के शहीदों के संबंध में की गई अपमानजनक टिप्पणी की कड़ी निंदा करता हूं, जो उत्पीड़न के शिकार जम्मू कश्मीर के लोगों के अधिकारों और सम्मान के लिए खड़े होने की वजह से बेरहमी से मारे गए थे।’’
उन्होंने कहा कि 1931 के शहीदों का जम्मू कश्मीर में हर कोई सम्मान करता है और उन्हें बदनाम करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में हर शख्स इनकी शहादत का सम्मान करता है और ये शहीद कश्मीर के लोगों द्वारा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए दिए गए महान बलिदानों की हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। उन्हें बदनाम करने के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से विरोध किया जाएगा।’’
जम्मू कश्मीर में 13 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश होता था और राज्यपाल या मुख्यमंत्री श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में एक आधिकारिक समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि देते थे।
वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद इस अवकाश को समाप्त कर दिया गया और अब आधिकारिक समारोह आयोजित नहीं किए जाते।
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