देश की खबरें | कतर में प्रवासी श्रमिकों का मानवाधिकार हनन गहरी चिंता का विषय: भारतीय मजदूर संघ

नयी दिल्ली, 14 जून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कतर में कार्य करने की ‘‘गुलाम जैसी स्थितियों’’ का हवाला देते हुए प्रवासी श्रमिकों के मानवाधिकारों के ‘‘घोर उल्लंघन’’ पर मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त की।

इससे कुछ ही दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो पूर्व पदाधिकारियों की पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणियों की इस्लामिक देश ने निंदा की थी।

बीएमएस ने एक बयान में कहा, ‘‘कतर को फीफा विश्व कप की मेजबानी मिलने के बाद से मानवाधिकार पर निगरानी रखने वाली कई संस्थाओं ने वहां काम करने की ‘गुलाम जैसी स्थितियों’ की हाल में जानकारी दी।’’

उसने कहा कि 2014 के बाद से उस देश में 1,611 भारतीय प्रवासियों की मौत हो चुकी है और भारत में उनके परिवारों को अपने संबंधियों के शव प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।

बीएमएस ने कहा कि उसने सरकार और हाल में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के दौरान कतर के उनके समकक्ष प्रतिनिधियों के सामने इस मुद्दे को उठाया।

बीएमएस के महासचिव विनय कुमार सिन्हा ने कहा, ‘‘यदि कतर सरकार इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो बीएमएस को जल्द से जल्द इस मुद्दे को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना पड़ेगा।’’

बयान के अनुसार, बीएमएस ने कतर में भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के श्रमिकों को ‘‘गंभीर परेशानी’’ देने वाली कफाला प्रणाली की भी आलोचना की। खाड़ी सहयोग परिषद प्रवासी श्रमिकों की निगरानी के लिए कफाला प्रणाली का इस्तेमाल करता है।

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