विदेश की खबरें | मानवाधिकार समर्थकों ने उत्तर कोरिया से पलायन करने वाले लोगों की विकिरण जांच कराने को कहा
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

सियोल, 21 फरवरी (एपी) मानवाधिकार समर्थकों ने मंगलवार को दक्षिण कोरिया से आग्रह किया कि वह उत्तर कोरिया से पलायन करने वाले उन सैकड़ों लोगों में विकिरण के संपर्क में आने की जांच कराए जो देश के परमाणु परीक्षण स्थल के पास रहते थे।

दक्षिण कोरियाई सरकार द्वारा वर्ष 2017 और 2018 में 40 लोगों की जांच की गई थी और पाया गया कि उनमें से कम से कम में असामान्य लक्षण दिखे जो उच्च विकिरण जोखिम की ओर इशारा हो सकती है।

लेकिन सियोल के ‘एकीकरण मंत्रालय’ ने कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियों से एक निर्णायक संबंध नहीं स्थापित किया जा सका और अन्य तथ्यों की भी संभावना थी जैसे कि उम्र, धूम्रपान की आदत या अन्य तरह के रसायन में संपर्क में आना।

इसके बाद दक्षिण कोरियाई विकिरण जांच बंद कर दी गई। सियोल आधारित ‘ट्रांजिशनल जस्टिस वर्किंग ग्रुप’ ने निष्कर्षों तथा भौगोलिक और जनगणना संबंधी अपने विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर कोरिया के छह परामणु ‘डेटोनेशन’ पुंग्ये-री परमाणु सुविधा के 40 किलोमीटर के अंदर पानी के जरिये रेडियोधर्मी पदार्थ का प्रसार कर सकते हैं।

यह भी कहा गया कि 10 लाख से अधिक लोग भूजल और कुओं पर निर्भर इलाके में रहते हैं, क्योंकि राजधानी प्योंगयांग और कुछ अन्य शहरों को छोड़कर अन्य जगह नल से जल का मिलना दुर्लभ है।

उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षण से संबंधित सुरक्षा चिंताओं को खारिज करते हुए कहा रहा कि हर बार परीक्षण की परिस्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी और उसे किसी तरह के विकिरण लीक होने की घटना का पता नहीं चला।

उत्तर कोरिया ने वर्ष 2018 में कुछ विदेशी पत्रकारों को कुछ सुरंगों के डेटोनेशन की तस्वीर खींचने की अनुमति दी थी, लेकिन उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को कभी पुंग्ये-री परीक्षण स्थल का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी।

मानवाधिकार की वकालत करने वाले समूह ने कहा कि वर्ष दक्षिण कोरिया के रिकॉर्ड दिखाते हैं कि 2006 में उत्तर कोरिया के पहले परमाणु परीक्षण के बाद से पुंग्ये-री परमाणु केंद्र के आसपास के क्षेत्र के करीब 900 लोग पलायन करके दक्षिण कोरिया पहुंचे।

समूह ने कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु सुविधा तक पहुंच के अभाव को देखते हुए पलायन करने वालों का विकिरण परीक्षण फिर से शुरू करना अहम था।

समूह के एक विधि विशेषज्ञ एथन ही-सेओक शिन ने कहा, ‘‘उत्तर कोरिया से पलायन करने उन लोगों को जिन्होंने विकिरण के संपर्क में आने के लक्षण प्रदर्शित किये है, उन्हें सटीक जानकारी के साथ ही उचित चिकित्सा उपचार मुहैया कराना चाहिए।’’

उन्होंने जांच परिणाम के आधार पर उत्तर कोरिया में स्वतंत्र जांच का भी अनुरोध किया।

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