देश की खबरें | संसद के नये भवन को जनता की संसद बनाने का ऐतिहासिक मौका: प्रधानमंत्री कार्यालय
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, आठ दिसंबर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को कहा कि संसद का नया भवन आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि का मूलभूत अंग होगा और आजादी के बाद पहली बार इसे जनता की संसद बनाने का ऐतिहासिक मौका होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बृहस्पतिवार को संसद के नये भवन की आधारशिला रखेंगे।

यह भी पढ़े | Forbes List of Most Powerful Women 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल, फोर्ब्‍स ने जारी की लिस्‍ट.

पीएमओ के मुताबिक, संसद का नया भवन 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य पर नये भारत की जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप होगा।

वर्तमान संसद भवन के निकट बनने वाला नया संसद भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस तथा ऊर्जा के दक्ष उपयोग और इसके संरक्षण को बढ़ावा देने वाला होगा। त्रिकोणात्मक आकार का नया संसद भवन सुरक्षा की दृष्टि से भी अभेद होगा।

यह भी पढ़े | किसान नेताओं की अमित शाह के साथ बैठक खत्म, सरकार भेजेगी प्रस्ताव, नहीं होगी कल की बैठक: 8 दिसंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

पीएमओं के अनुसार लोकसभा का आकार वर्तमान लोकसभा से तीन गुना बड़ा होगा और राज्यसभ भी वर्तमान उच्च सदन से बड़ी होगी।

उसके मुताबिक नये भवन की आंतरिक साज सज्जा भारतीय संस्कृति के साथ क्षेत्रीय कला, शिल्प और स्थापत्यकला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करेगी।

भवन निर्माण योजना के अनुसार नये संसद भवन में एक विशाल संविधान कक्ष होगा, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक धरोहर को प्रदर्शित किया जाएगा। संसद की नयी इमारत भूकंप रोधी क्षमता वाली होगी

नये संसद भवन के शिलान्यास समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और कई केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहेंगे।

इनके अलावा 200 गणमान्य लोग, सांसद, राजदूत और उच्चायुक्त भी इस समारोह में शिरकत करेंगे।

संसद का मौजूदा भवन ब्रिटिशकालीन है जो एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किया गया था। दोनों ने ही नयी दिल्ली क्षेत्र की योजना और निर्माण की जिम्मेदारी निभाई् थी।

वर्तमान संसद भवन की आधारशिला 12 फरवरी, 1921 को रखी गई थी और इसके निर्माण में छह वर्ष का समय लगा था तथा उस वक्त 83 लाख रुपये की लागत आई थी। इस भवन का उद्घाटन 18 जनवरी, 1927 को तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड इरविन ने किया था।

गत सितंबर महीने में 861.90 करोड़ रुपये की लागत से नए संसद भवन के निर्माण का ठेका टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिला था। यह नया भवन ‘सेंट्रल विस्टा’ परियोजना के तहत है और इसे वर्तमान संसद भवन के नजदीक बनाया जाएगा।

ब्रजेन्द्र

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)