शिमला, 25 सितंबर हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र एक दिन के गैर सरकारी कामकाज सहित सात बैठकों के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगति कर दिया गया और सदन की कार्यवाही 36 घंटों से ज्यादा चली।
सोमवार को कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने सरकार से नाचन क्षेत्र से विधायक विनोद कुमार के खिलाफ मामले को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि ये विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज कराने की गलत प्रथा को बढ़ावा देगा।
कुमार के खिलाफ अगस्त में एक राजस्व अधिकारी की शिकायत पर एक सरकारी सेवक को उसके काम में बाधा पैदा करने और चोट पहुंचाने की धमकी देने का मामला दर्ज किया गया था।
ठाकुर ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर सरकार के श्वेत पत्र को लेकर हैरानी व्यक्त की और कहा कि पत्र में ऐसे कई मुद्दे हैं, जो केंद्र सरकार के कार्यक्षेत्र का हिस्सा है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने 15वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य का मामला प्रभावी तरीके से नहीं रखा।
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप राज्य को राजस्व घाटा अनुदान का हस्तांतरण कम हुआ और ऋण प्राप्त करने की सीमा में भी कमी आई, जिसकी वजह से राज्य की वित्तीय स्थिति और खराब हो गई।
अग्निहोत्री ने हैरानी जताई कि भाजपा ने केंद्र से 12 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मांगने के राज्य सरकार के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र सरकार से 12,000 करोड़ रुपये मंजूर करवाकर अपनी 'गलती' को सुधार सकती है।
18 सितंबर से शुरू हुए सत्र को समाप्त करते हुए विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि सत्र के दौरान 369 तारांकित व 176 अतारांकित सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि आठ विधेयक पेश और पारित किए गए।
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