भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.-ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर ट्रंप की कड़ी चेतावनी
-जी7 देशों ने चीन पर निर्भरता घटाने के लिए रेयर अर्थ सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर चर्चा की
-शक्सगाम घाटी पर चीन का नया दावा, सड़क निर्माण को बताया "जायज"
-पनडुब्बी डील के करीब पहुंचे भारत और जर्मनी
-'10 मिनट' में डिलीवरी पर सरकार सख्त
किम यो जोंग ने कहा, दक्षिण कोरिया का भरम है अच्छे रिश्ते की उम्मीद
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन, किम यो जोंग ने मंगलवार, 13 जनवरी को दक्षिण कोरिया को एक कड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है. सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के माध्यम से जारी एक बयान में किम यो जोंग ने कहा कि दक्षिण कोरिया द्वारा संबंधों को बेहतर बनाने की उम्मीद एक ऐसा भ्रम है जिसे कभी साकार नहीं किया जा सकता.
उन्होंने दक्षिण कोरिया पर उत्तर कोरिया की संप्रभुता का उल्लंघन करने और गंभीर उकसावे की कार्रवाई करने का आरोप लगाया. हालांकि, उन्होंने इस बात का विस्तार से खुलासा नहीं किया कि दक्षिण कोरिया ने हाल ही में ऐसी कौन सी कार्रवाई की है जिसे वे उकसावा मान रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उत्तर कोरिया की उस नई नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह दक्षिण कोरिया को अब एक दुश्मन देश के रूप में देख रहा है. पिछले कुछ महीनों में किम जोंग उन ने भी दक्षिण कोरिया के साथ पुनर्मिलन की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म करने और सैन्य तैयारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
फ्रांस में दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार जन्म से ज्यादा हुई मौतों की संख्या
फ्रांस के राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (आईएनएसईई) ने मंगलवार, 13 जनवरी को चौंकाने वाले आंकड़े जारी करते हुए बताया कि साल 2025 में देश में मरने वालों की संख्या पैदा होने वाले बच्चों से अधिक रही. 1945 यानी दूसरे विश्व युद्ध के अंत के बाद यह पहला मौका है जब फ्रांस ने ऐसी 'नेगेटिव' जनसांख्यिकीय गिरावट दर्ज की है.
पिछले साल फ्रांस में 6,51,000 मौतें हुईं, जबकि जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या घटकर 6,45,000 रह गई. यह बदलाव फ्रांस के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उसे लंबे समय तक यूरोप में सबसे मजबूत जनसंख्या वृद्धि वाले देश के रूप में देखा जाता था.
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इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण प्रजनन दर का गिरना है, जो अब प्रति महिला 1.56 रह गई है. यह प्रथम विश्व युद्ध के समय से अब तक का सबसे निचला स्तर है और सरकार के उन अनुमानों से बहुत कम है जिसके आधार पर पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं बनाई जाती हैं. अब देश में बुजुर्गों की आबादी बढ़कर 22 फीसदी हो गई है, जो युवाओं के लगभग बराबर है.
हालांकि, इस गिरावट के बावजूद प्रवासन की वजह से फ्रांस की कुल आबादी मामूली रूप से बढ़कर 6.91 करोड़ हो गई है. पिछले साल लगभग 1.76 लाख लोग बाहर से आकर फ्रांस में बसे, जिससे जनसंख्या का संतुलन पूरी तरह बिगड़ने से बच गया.
जर्मन चांसलर ने कहा, 'ईरान का शासन अब अपने आखिरी दौर में है'
ईरान में गंभीर आर्थिक संकट के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन अब शासन परिवर्तन की व्यापक मांग में बदल चुके हैं. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने कहा कि जब कोई शासन केवल हिंसा के दम पर सत्ता में बना रहता है, तो उसका अंत निश्चित है. उन्होंने भारत यात्रा के दौरान बेंगलुरु में स्पष्ट शब्दों में कहा, "मेरा मानना है कि हम इस समय ईरानी शासन के अंतिम दिन और हफ्ते देख रहे हैं." मैर्त्स ने ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही क्रूर और अत्यधिक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है.
चांसलर ने बताया कि जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के विदेश मंत्री आपस में निरंतर संपर्क में हैं. इन देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान में एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना हो सके. डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ भी इस मुद्दे पर कूटनीतिक समन्वय जारी है ताकि वैश्विक स्तर पर ईरान पर दबाव बढ़ाया जा सके. मैर्त्स ने उम्मीद जताई कि इस पूरे संघर्ष का अंत शांतिपूर्ण तरीके से होगा और ईरानी जनता को उनका अधिकार मिलेगा.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब जर्मनी पहले ही यूरोपीय संघ के साथ मिलकर आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित करने की कोशिशों में जुटा है. चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा के दौरान इस वैश्विक मुद्दे पर दिया गया यह संदेश अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काफी वजन रखता है.
भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार से ड्रोन घुसपैठ का आरोप लगाया
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार, 13 जनवरी को आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने विवादित कश्मीर में भारत नियंत्रित क्षेत्र में ड्रोन उड़ाए हैं. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ऐसी गतिविधियां नामंजूर हैं और इन्हें तुरंत रोका जाए. दोनों देशों के सैन्य संचालन प्रमुखों (डीजीएमओ) ने इसी दिन बातचीत भी की.
द्विवेदी ने बताया कि पिछले सप्ताह भारतीय सीमा के पास कई ड्रोन देखे गए, जिनमें से सात शनिवार (10 जनवरी) को और दो-तीन रविवार (11 जनवरी) को भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए. उन्होंने कहा कि ये ड्रोन संभवत यह जांचने के लिए आए थे कि कहीं हमारी रक्षा व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं, जिसके जरिए आतंकियों को भेजा जा सके. सेना प्रमुख ने आशंका जताई कि ड्रोन की लाइटें चालू थीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे निगरानी के उद्देश्य से आए थे.
जर्मनी में अनोखी चोरी: घर का दरवाजा तोड़कर चुराया सिर्फ 'सॉसेज जार'
जर्मनी के सोमेरडा शहर में एक ऐसी चोरी हुई है जिसने पुलिस और स्थानीय निवासियों दोनों को हैरत में डाल दिया है. पूर्वी जर्मनी के इस शहर में चोरों ने एक 29 वर्षीय युवक के अपार्टमेंट का मुख्य दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, लेकिन वहां से कोई कीमती सामान ले जाने के बजाय उन्होंने केवल सॉसेज का एक जार चुराया.
पुलिस ने बताया कि गायब हुए जार की कुल कीमत महज 3 यूरो (लगभग 300 रुपये) है. पीड़ित और पुलिस दोनों इस बात से हैरान हैं कि इतनी छोटी चीज के लिए चोरों ने घर में घुसने का जोखिम क्यों उठाया.
पुलिस के अनुसार, चोरों ने घर में मौजूद अन्य किसी भी महंगे सामान या नकदी को छुआ तक नहीं. अधिकारियों ने बताया कि चोरों द्वारा अपार्टमेंट के दरवाजे को तोड़ने में जो नुकसान हुआ है, उसकी मरम्मत का खर्च चुराए गए सॉसेज की कीमत से कई गुना अधिक होगा.
हालांकि चोरी हुए जार की कीमत बहुत कम है, लेकिन पुलिस ने इसे चोरी के एक विशेष गंभीर मामले के रूप में दर्ज किया है क्योंकि इसमें घर में जबरन प्रवेश शामिल है. फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी की शरारत थी या चोरों का कोई और मकसद था जो अधूरा रह गया.
पाकिस्तान-इंडोनेशिया रक्षा सौदे पर बातचीत तेज, 40 विमानों की डील संभावित
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्जाफी स्जामसोद्दीन ने इस्लामाबाद में मुलाकात कर रक्षा सहयोग पर चर्चा की. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में 40 से अधिक जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमानों और शाहपर ड्रोन की संभावित बिक्री पर बात हुई. दोनों देशों ने बैठक की पुष्टि की, लेकिन कहा कि अभी कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है.
इंडोनेशिया अपनी पुरानी वायुसेना को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी कर रहा है. हाल के वर्षों में उसने 42 फ्रांसीसी राफेल जेट और तुर्की के 48 कान फाइटर जेट का ऑर्डर दिया है. इसके अलावा, जकार्ता चीन के जे-10 और अमेरिकी F-15EX जेट खरीदने पर भी विचार कर रहा है. पाकिस्तान से संभावित सौदा इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
पाकिस्तान का रक्षा उद्योग हाल के वर्षों में तेजी से उभरा है, खासकर जेएफ-17 विमानों की सफलता के बाद. ये विमान पहले अजरबैजान को बेचे गए और लीबिया की नेशनल आर्मी के साथ 4 अरब डॉलर के हथियार समझौते में शामिल रहे. पाकिस्तान अब बांग्लादेश और सऊदी अरब के साथ भी बड़े रक्षा सौदों पर बातचीत कर रहा है, जिससे वह क्षेत्रीय रक्षा बाजार में अहम खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रहा है.
'स्पेशल फंड' बना जर्मनी का 2025 का 'सबसे खराब शब्द'
जर्मनी की मार्बुर्ग यूनिवर्सिटी के भाषाविदों की एक स्वतंत्र जूरी ने हर साल की तरह इस बार भी एक ऐसे शब्द का चयन किया है जो भ्रामक या अनुचित है. साल 2025 के लिए "जोंडरफेरमोएगेन" जिसका अर्थ 'विशेष निधि' या 'स्पेशल फंड' है, को जर्मनी का सबसे खराब शब्द घोषित किया गया है.
यूनिवर्सिटी की जूरी ने तर्क दिया है कि चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार और राजनेताओं ने इस शब्द का इस्तेमाल जनता को गुमराह करने के लिए किया. दरअसल, सरकार ने बुनियादी ढांचे और जलवायु सुधारों के लिए 500 अरब यूरो के जिस 'विशेष कोष' की घोषणा की थी, वह वास्तव में नया सरकारी कर्ज था. जूरी के अनुसार, "स्पेशल फंड" शब्द का उपयोग करके सरकार ने भारी कर्ज जैसे कड़वे सच को एक सकारात्मक और सुखद नाम के पीछे छिपाने की कोशिश की.
आम जर्मन भाषा में "विशेष निधि" का अर्थ ऐसी संपत्ति से होता है जो आपकी कुल संपत्ति का हिस्सा हो, लेकिन आर्थिक शब्दावली में इसका अर्थ बजट के बाहर लिया गया वह कर्ज है जो किसी खास उद्देश्य के लिए लिया जाता है. जूरी का कहना है कि चूंकि आम नागरिक इसे 'बचत' या 'संपत्ति' के रूप में देखते हैं, इसलिए सरकार द्वारा अरबों के नए कर्ज को यह नाम देना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के खिलाफ है.
यह चयन चार भाषाविदों और एक पत्रकार की स्वतंत्र टीम द्वारा किया गया है. वे हर साल ऐसे शब्दों को चुनते हैं जो मानवीय गरिमा या लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं या सामाजिक समूहों के साथ भेदभाव करते हैं.
बांग्लादेश ने आईसीसी से कहा, 'टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत नहीं जाएंगे'
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने मंगलवार, 13 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में दोहराया कि उसकी टीम अगले महीने भारत में होने वाले टी20 विश्व कप में हिस्सा लेने नहीं जाएगी. बोर्ड ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मांग की कि बांग्लादेश के ग्रुप मैच भारत से हटाकर सह-आयोजक श्रीलंका में कराए जाएं. टूर्नामेंट 7 फरवरी से शुरू होना है और बांग्लादेश के चार ग्रुप मैच भारत में निर्धारित हैं.
यह विवाद 3 जनवरी को तब भड़का जब भारत ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से बाहर कर दिया. रहमान को दिसंबर में कोलकाता फ्रेंचाइजी ने 9 करोड़ रुपये से अधिक में खरीदा था. उनकी अचानक हुई विदाई ने ढाका में नाराजगी को हवा दी. आईसीसी ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, जबकि बीसीबी का कहना है कि वह खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति पर कायम है.
फ्रांस: चुनाव पाबंदी के खिलाफ पेरिस की अदालत में पेश होंगी मरीन ला पेन
फ्रांस की दक्षिणपंथी नेता मरीन ला पेन के लिए 13 जनवरी का दिन उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होने वाला है. वे यूरोपीय संघ (ईयू) के फंड में हेराफेरी के आरोपों में लगी 'चुनावी पाबंदी' के खिलाफ पेरिस की अपील अदालत में पेश हो रही हैं.
मरीन ला पेन पर आरोप है कि उन्होंने 2004 से 2016 के बीच यूरोपीय संसद के फंड का इस्तेमाल अपनी पार्टी 'नेशनल रैली' के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए किया था. मार्च 2025 में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 4 साल की जेल (जिसमें 2 साल निलंबित हैं) और 5 साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
अपील अदालत का फैसला यह तय करेगा कि ला पेन 2027 के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बन पाएंगी या नहीं. यदि अदालत पांच साल की पाबंदी को बरकरार रखती है, तो वे 2027 का चुनाव नहीं लड़ पाएंगी. यदि यह पाबंदी कम होकर एक या दो साल की रह जाती है, तो उनके चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो सकता है.
वर्तमान राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों संवैधानिक रूप से तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते और हालिया सर्वे दिखाते हैं कि ला पेन की लोकप्रियता (42 फीसदी) अब तक के उच्चतम स्तर पर है. अगर अदालत उनकी पाबंदी बरकरार रखती है, तो ला पेन के उत्तराधिकारी के रूप में 30 वर्षीय जॉर्डन बारडेला को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है. बारडेला वर्तमान में फ्रांस के सबसे लोकप्रिय युवा नेताओं में से एक हैं.
अगर कुत्ते ने काटा तो राज्य सरकार देगी मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 13 जनवरी को संकेत दिया कि हर कुत्ते के काटने और उससे होने वाली मौत पर राज्यों पर भारी मुआवजे की जिम्मेदारी तय की जा सकती है. अदालत ने कहा कि अगर कोई संगठन या व्यक्ति सड़क पर कुत्तों को खाना खिलाता है और वे किसी को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्यों आवारा कुत्तों को सड़कों पर घूमने दिया जाए, जब उनके हमले का असर जीवनभर रहता है.
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब नौ साल के बच्चे की मौत उन कुत्तों के हमले से होती है जिन्हें किसी संगठन ने खिलाया हो, तो क्या उस संगठन को नुकसान की भरपाई नहीं करनी चाहिए? इससे पहले 7 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि यह जानना संभव नहीं कि कुत्ता किस मूड में है. वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि अगर जानवरों के साथ सहानुभूति से पेश आया जाए तो वे हमला नहीं करते.
ट्रंप की धमकियों के बीच कोपेनहेगन जाएगा अमेरिकी सांसदों का दल
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को "किसी न किसी तरह" हासिल करने की जिद के बाद उपजे तनाव को कम करने के लिए अमेरिकी सांसदों का एक उच्च-स्तरीय दल इस सप्ताह डेनमार्क जा रहा है. सीनेटर क्रिस कून्स के नेतृत्व में यह द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल कोपेनहेगन में शीर्ष अधिकारियों से मिलकर यह संदेश देगा कि अमेरिकी संसद डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान करती है.
सांसदों का तर्क है कि राष्ट्रपति द्वारा बताए गए रूस और चीन के खतरे तत्काल नहीं हैं और अमेरिका को अपने सबसे पुराने सहयोगियों में से एक के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.
जहां डॉनल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक व्यापारिक सौदे की तरह पेश किया, वहीं डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने इसे "अपमानजनक" बताया है. ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश बिकाऊ नहीं है और उनकी सुरक्षा व्यवस्था नाटो के दायरे में पूरी तरह सुरक्षित है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने भी चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का अमेरिकी अधिग्रहण नाटो गठबंधन के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है.
इस बीच, कूटनीतिक समाधान के लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड के दूत वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ वार्ता करेंगे. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने भी इस मुद्दे पर नाटो के भीतर आपसी सहयोग और सुरक्षा बढ़ाने का समर्थन किया है, ताकि अमेरिका के सुरक्षा संबंधी तर्कों का जवाब दिया जा सके. अमेरिकी सांसदों की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे राष्ट्रपति की बल प्रयोग वाली भाषा के बजाय निवेश और मजबूत व्यापारिक संबंधों के जरिए साझेदारी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
ब्रिटेन में एआई से बिना सहमति यौन तस्वीरें बनाना अब होगा अपराध
ब्रिटेन सरकार इसी हफ्ते एक नया कानून लागू करने जा रही है जिसके तहत एआई टूल का उपयोग करके किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी यौन तस्वीरें बनाना गैरकानूनी होगा. यह कार्रवाई मुख्य रूप से इलॉन मस्क के एआई चैटबॉट 'ग्रोक' द्वारा हाल ही में बनाई गई कुछ न्यूड तस्वीरों के विवाद के बाद की जा रही है. ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी सचिव लिज केंडल ने बताया कि डेटा एक्ट के तहत इस अपराध को तुरंत लागू किया जाएगा. इसके साथ ही नूडिफिकेशन ऐप्स और ऐसे टूल सप्लाई करने वाली कंपनियों को भी 'क्राइम एंड पुलिसिंग बिल' के जरिए अपराधी माना जाएगा.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने इलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे ग्रोक को नियंत्रित करने में विफल रहते हैं, तो सरकार खुद कड़े कदम उठाएगी. स्टार्मर ने कहा, "अगर आप नुकसान और दुर्व्यवहार से मुनाफा कमाते हैं, तो आप खुद को विनियमित करने का अधिकार खो देते हैं." डाउनिंग स्ट्रीट वर्तमान में प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी मौजूदगी की भी समीक्षा कर रहा है, क्योंकि कई मंत्रियों ने इस प्लेटफॉर्म के बहिष्कार की मांग की है.
ब्रिटिश मीडिया वॉचडॉग ऑफकॉम ने इस मामले में औपचारिक जांच शुरू कर दी है कि क्याएक्स ने सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन किया है. यदि प्लेटफॉर्म दोषी पाया जाता है, तो उस पर उसकी वैश्विक आय का 10 फीसदी या 1.8 करोड़ पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. गंभीर मामलों में साइट को पूरी तरह ब्लॉक करने का भी प्रावधान है. मलेशिया और इंडोनेशिया द्वारा ग्रोक पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब ब्रिटेन की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई नियमन के लिए एक नया उदाहरण पेश कर रही है.
ग्रीनलैंड विवाद: जर्मनी ने अमेरिका की सैन्य हमले की आशंका को नकारा
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की "किसी भी तरह" ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी के बीच कहा है कि उन्हें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का कोई संकेत नहीं मिला है. वाडेफुल ने स्पष्ट किया कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को सुलझाना सभी का साझा हित है और नाटो इस दिशा में ठोस योजनाएं विकसित कर रहा है. जर्मनी का मानना है कि सैन्य टकराव के बजाय नाटो के ढांचे के भीतर सहयोग बढ़ाना ही इस समस्या का एकमात्र हल है.
जहां एक ओर डॉनल्ड ट्रंप रूस और चीन की गतिविधियों का हवाला देकर ग्रीनलैंड को कब्जाने की जिद पर अड़े हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के भीतर से भी उनके खिलाफ स्वर उठने लगे हैं. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के एक दल ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है. यह प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह कोपेनहेगन का दौरा करेगा ताकि व्यापार और सुरक्षा पर चर्चा की जा सके, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि अमेरिकी संसद अपने सहयोगियों के साथ खड़ी है.
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ग्रीनलैंड की सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि वे किसी भी परिस्थिति में अमेरिकी नियंत्रण को स्वीकार नहीं करेंगे. इस बीच, नाटो और डेनमार्क ने आर्कटिक क्षेत्र में रक्षा बढ़ाने के लिए नए प्रस्तावों पर काम शुरू कर दिया है, ताकि सुरक्षा के उन गैप्स को भरा जा सके जिनका जिक्र ट्रंप बार-बार कर रहे हैं. इस सप्ताह वॉशिंगटन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के राजनयिकों की मार्को रुबियो के साथ होने वाली बैठक इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी.
'10 मिनट' में डिलीवरी पर सरकार सख्त
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने क्विक डिलीवरी सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स को डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं. एनडीटीवी ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि मंत्री ने डिलीवरी टाइमलाइन को लेकर चिंताओं के बारे में जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो समेत कई एग्रीगेटर्स के अधिकारियों से मुलाकात की.
ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने श्रम मंत्री से मुलाकात के बाद गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव और काम के तनावपूर्ण हालात का मुद्दा उठाने के बाद अपनी मर्जी से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे रोकने का फैसला किया है. समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, ब्लिंकिट ने पहले ही इस निर्देश पर काम करते हुए अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी का वादा हटा दिया है. साथ ही, आने वाले दिनों में दूसरे एग्रीगेटर्स के भी ऐसा करने की उम्मीद है.
10 मिनट डिलीवरी का वादा लंबे समय से विवादों में रहा है. आलोचकों का कहना है कि इससे डिलीवरी पार्टनर्स पर असुरक्षित तरीके से काम करने का दबाव बढ़ता है. 25 दिसंबर को गिग वर्कर्स यूनियनों ने बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था और 31 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी. इसके बाद स्विगी और जोमैटो ने डिलीवरी इंसेंटिव बढ़ाए.
पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर के सामने उठाया 'बेबी अरिहा' का मुद्दा
भारत और जर्मनी के बीच रक्षा और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के सामने बेबी अरिहा का संवदेनशील मुद्दा उठाया. पांच साल की अरिहा को सितंबर 2021 में बर्लिन में उसके माता-पिता से अलग कर दिया गया था, जब वह केवल सात महीने की थी. उस समय जर्मन अधिकारियों ने दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था, जो बाद में खारिज हो गया.
हालांकि माता-पिता पर लगे आरोपों को अदालत ने निराधार पाया, अरिहा को अब तक परिवार को नहीं सौंपा गया है. भारतीय नागरिक अरिहा जर्मनी की सामाजिक देखभाल प्रणाली में ही रह रही है. इस मामले को लेकर नई दिल्ली और बर्लिन के बीच कई बार राजनयिक स्तर पर बातचीत हो चुकी है, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को कहा, भारत इस मुद्दे को अन्य अहम मामलों से अलग नहीं देखता. उन्होंने कहा, "हम हर स्तर पर जर्मन सरकार से इस पर चर्चा कर रहे हैं. हमारा प्रयास है कि अरिहा का पालन-पोषण भारतीय वातावरण में हो-चाहे वह भारतीय समुदाय के साथ समय बिताना हो, त्योहारों में शामिल होना हो या हिंदी सीखने की व्यवस्था करना."
अरिहा की कस्टडी को लेकर चल रहा विवाद अब भारत-जर्मनी संबंधों में एक अहम बिंदु बन गया है. यह मामला पहले भी जर्मन अधिकारियों की भारत यात्रा के दौरान उठाया गया था.













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