शिमला, चार सितंबर हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया जो संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल रोधी कानून) के तहत अयोग्य करार दिए गए सदस्यों को पेंशन पाने से रोकेगा।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन)संशोधन विधेयक, 2024 छह पूर्व कांग्रेस विधायकों को प्रभावित करेगा, जिन्हें फरवरी में कटौती प्रस्तावों पर चर्चा और बजट पारित करने के दौरान व्हिप की अवहेलना करने और सदन में उपस्थित नहीं रहने के कारण अध्यक्ष द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
विपक्षी भाजपा ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इससे राजनीतिक प्रतिशोध की बू आती है और इसे प्रतिगामी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
इन छह पूर्व विधायकों में सुधीर शर्मा, रवि ठाकुर, राजेंद्र राणा, इंद्र दत्त लखनपाल, चैतन्य शर्मा और देवेंद्र कुमार हैं।
इन छह कांग्रेस विधायकों ने इस साल 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था।
इन सभी ने इस साल भाजपा के टिकट पर उपचुनाव भी लड़ा था। जिसमें सुधीर शर्मा और लखनपाल जीत गये, लेकिन चार अन्य नहीं जीत सके।
हिमाचल प्रदेश इस तरह का विधेयक पारित करने वाला पहला राज्य है जिसके तहत यदि कोई व्यक्ति किसी भी समय संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अयोग्य घोषित कर दिया गया हो तो वह अधिनियम के अंतर्गत पेंशन का हकदार नहीं होगा।
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