देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने आप सरकार से कहा : निर्माण मजदूरों के पंजीकरण में कोताही नहीं होनी चाहिए

नयी दिल्ली, 17 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी की सरकार से कहा कि भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) बोर्ड में मजदूरों के पंजीकरण में ‘‘कोताही नहीं’’ होनी चाहिए ताकि महामारी के दौरान उन्हें पांच हजार रुपये की अनुग्रह राशि मिल सके।

उच्च न्यायालय ने बोर्ड को सुझाव दिया कि महामारी को देखते हुए आवेदकों के पंजीकरण या नवीनीकरण के ऑनलाइन सत्यापन पर विचार करें ताकि मानव संपर्क को न्यूनतम किया जा सके। बोर्ड दिल्ली सरकार के तहत आता है।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि चूंकि आवेदन ऑनलाइन किए गए हैं, इसलिए वीडियो कॉल के माध्यम से साक्षात्कार कर उसी तरह से उनका सत्यापन किया जा सकता है।

बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली सरकार के वकील संजय घोष ने कहा कि अदालत के सुझाव पर विचार किया जाएगा।

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बोर्ड ने अदालत से कहा कि इसने दिल्ली राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण की पेशकश को स्वीकार कर लिया है कि 1800 रुपये प्रतिदिन के मानदेय पर इसके 100 वकील आवेदनों का सत्यापन करेंगे।

उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि वकीलों द्वारा सत्यापन रिपोर्ट देने के बाद बोर्ड को इसके पुन: सत्यापन का काम नहीं करना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘वकीलों द्वारा सत्यापन के बाद और बाधा नहीं खड़ी की जानी चाहिए।’’

घोष ने इस आशंका को दूर करते हुए कहा कि काम का दोहराव नहीं होगा।

उच्च न्यायालय सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में उन्होंने मांग की कि सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू के तहत किया जाए ताकि उन्हें पांच हजार रुपये प्रति महीन का राहत पैकेज मिल सके, जो लॉकडाउन के दौरान हर मजदूर को दिया जा रहा है।

याचिका में बताया गया कि भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण उपकर कानून के तहत दो हजार करोड़ रुपये से अधिक इकट्ठा किए जाने के बावजूद केवल 37,127 निर्माण मजदूर पंजीकृत हैं और उन्हें यह लाभ मिल रहा है।

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