बेंगलुरु, 11 सितंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया है कि बेंगलुरु प्रशासन उन लोगों पर जुर्माना राशि बढ़ाए जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली का उल्लंघन करते हैं तथा उनपर भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक कार्रवाई करे क्योंकि वर्तमान जुर्माना प्रतिरोधक के तौर पर काम करने के लिए नाकाफी है।
बृह्त बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) द्वारा 2019 और 2023 के बीच नियमों के 3.84 लाख उल्लंघनकर्ताओं से बस 11.66 करोड़ रुपये जुर्माना वसूले जाने की एक रिपोर्ट पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि हर उल्लंघनकर्ता से वसूली गयी जुर्माना राशि इतनी छोटी रकम है कि वह प्रतिरोधक का काम नहीं कर पाती है।
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी. वराले और न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित की खंडपीठ 12 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें बेंगलुरु में प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की मांग की गयी है।
पहली ऐसी जनहित याचिका 2012 की है और अदालत ने इन वर्षों में राज्य सरकार और बीबीएमपी को कई निर्देश जारी किये हैं।
उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि जुर्माना बढ़ाने के अलावा ‘बीबीएमपी उल्लंघनकर्ताओं पर दंडात्मक कार्रवाई करने और भादंसं के उपयुक्त प्रावधानों का इस्तेमाल करने पर भी विचार कर सकता है।’’
बेंगलुरु के कई रेसीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, राज्य सरकार और बीबीएमपी इस जनहित याचिका में प्रतिवादी हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि अपार्टमेंट मालिकों, फ्लैट मालिकों या सोसायटी में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को उल्लंघनकर्ता के तौर पर पाया जाता है तो प्रतिवादी बीबीएमपी द्वारा उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ उपयुक्त कदम उठाया जाना जरूरी है।’’
उच्च न्यायालय ने बीबीएमपी और कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अदालत द्वारा जारी निर्देशों पर कार्रवाई रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।
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