हैदराबाद, 10 जुलाई राज्य सरकार द्वारा यहां स्थित सचिवालय की इमारतों को गिराने की शुरुआत किए जाने के तीन दिन बाद तेलंगाना उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निर्देश जारी कर इस कार्रवाई पर सोमवार तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी।
सरकार मौजूदा सचिवालय को गिराकर इसी जगह पर नया भवन खड़ा करना चाहती है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति बी विजयसेन रेड्डी की पीठ प्रोफेसर पी एल विश्वेश्वर राव और डॉ. चेरुकु सुधाकर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि लगभग 10 लाख वर्ग फुट में बने 10 ब्लॉक वाले सचिवालय को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना गिराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 तथा महामारी अधिनियम, 1897 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और अन्य कानूनों के प्रावधानों के विपरीत है।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों के जवाब में सभी आवश्यक ब्योरा प्रस्तुत करे।
के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मौजूदा सचिवालय को गिराकर नया भवन बनाने के खिलाफ दायर जनहित याचिकओं को उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद सात जुलाई को परिसर स्थित इमारतों को ढहाना शुरू कर दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महामारी की स्थिति के बीच मौजूदा भवन को ढहाना सरकार की ‘एकतरफा कार्रवाई’ है और यह आसपास के पांच लाख लोगों को स्वच्छ हवा लेने से वंचित करती है।
उच्च न्यायालय ने अब सचिवालय को ढहाए जाने पर 13 जुलाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।
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