देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने वकीलों के उपनगरीय ट्रेन से यात्रा संबंधी याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या वकीलों को अब शहर में उपनगरीय रेल नेटवर्क का उपयोग करने की अनुमति दी जाए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, तीन सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्या वकीलों को अब शहर में उपनगरीय रेल नेटवर्क का उपयोग करने की अनुमति दी जाए।

उच्च न्यायालय में कोविड-19 से पहले वाली व्यवस्था बहाल हो गई है, जब अदालती कार्यवाही के लिये न्यायाधीश और वकील वहां उपस्थित रहा करते थे।

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न्यायमूर्ति अमजद सैयद ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।

दरअसल, एक जनहित याचिका (पीआईएल) और वकीलों की कई हस्तक्षेप अर्जियों पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह निर्देश जारी किया।

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पीआईएल और अर्जियों के जरिये यह अनुरोध किया गया है कि वकीलों को कोविड-19 महामारी के बीच उपनगरीय ट्रेनों से अदालत आने-जाने की अनुमति दी जाए।

उल्लेखनीय है कि इस साल 21 जुलाई को राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर कहा था कि वह वकीलों को लोकल ट्रेनों से यात्रा करने की अनुमति नहीं दे सकती क्योंकि महामारी के प्रसार के चलते सुरक्षा उपायों के तहत ट्रेनों एवं यात्रियों की संख्या सीमित कर दी गई है।

याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार को भी ज्ञापन दिया था, जिसे पांच अगस्त को खारिज कर दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी है और अदालत ने उसे आठ अगस्त को जवाब दाखिल करने कहा था।

बृहस्पतिवार को याचिकाकर्ताओं ने इस बात का जिक्र किया कि राज्य सरकार ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है।

उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान उपस्थिति बहाल होने पर विचार करते हुए ट्रेनों से यात्रा की अनुमति देने की जरूरत दोहराई।

इस पर, पीठ ने कहा कि वकीलों को ट्रेन से यात्रा की अनुमति देने के लिये अभी राज्य सरकार के पास क्या कोई प्रस्ताव है।

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने कहा, ‘‘फिलहाल, ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। लेकिन राज्य में अनलॉक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। क्रमिक रूप से, हम विचार करेंगे। हम इन सभी मुद्दों पर विचार करेंगे। ’’

गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त से सिर्फ फौजदारी मामलों में अपीलों की कोविड-19 से पहले जैसी (सभी पक्षों एवं न्यायाधीशों की उपस्थिति के साथ) सुनवाई बहाल की है।

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