देश की खबरें | अग्निशमन संबंधी एनओसी के बिना संचालित कोचिंग केंद्रों को बंद करने का उच्च न्यायालय का आदेश

नयी दिल्ली, 25 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में अग्निशमन सेवा विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बिना संचालित हो रहे सभी कोचिंग केंद्रों को बंद करने का मंगलवार को निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि "अग्नि सुरक्षा बहुत जरूरी है" और सभी कोचिंग केंद्रों को दिल्ली मास्टर प्लान 2021 एवं अन्य नियमों का पालन करना चाहिए।

अदालत मुखर्जी नगर में कोचिंग केंद्रों के संचालन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

उच्च न्यायालय ने जून में मुखर्जी नगर में एक कोचिंग केंद्र में लगी आग का स्वत: संज्ञान लेने के बाद कार्यवाही शुरू की थी और यह भी उन्हीं याचिकाओं में शामिल थी।

मामले में दायर एक स्थिति रिपोर्ट में, दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि राष्ट्रीय राजधानी में संचालित किए जा रहे 583 कोचिंग संस्थानों में से केवल 67 के पास दिल्ली अग्निशमन सेवा का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है।

पीठ ने कहा, "यदि कोई कोचिंग केंद्र मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, तो उसे बंद कर दिया जाना चाहिए। कोई अन्य विकल्प नहीं है।" पीठ में न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी भी शामिल हैं।

अदालत ने आदेश दिया, “प्रतिवादी (एमसीडी और दिल्ली सरकार) को उन कोचिंग केंद्रों को बंद करने का निर्देश दिया जाता है, जिनके पास अग्नि संबंधी एनओसी नहीं है।”

अदालत ने पुलिस, अग्निशमन सेवा विभाग और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करें।

इसमें कहा गया है कि अगर कोचिंग केंद्रों के अलावा नियमों का पालन नहीं कर रहे अन्य ढांचों पर भी एमसीडी कार्रवाई करेगी।

दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि स्थिति रिपोर्ट से पता चला है कि 95 प्रतिशत से अधिक कोचिंग केंद्रों के पास विभाग का अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं है, जबकि यह जरूरी है।

दिल्ली अग्निशमन सेवा ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा कि उसने 461 कोचिंग केंद्रों का सर्वेक्षण किया और उन्होंने पाया कि इन संस्थानों में अग्नि निवारक और सुरक्षा उपायों को नहीं अपनाया गया था, जो दिल्ली अग्निशमन सेवा अधिनियम और उसके नियमों के अनुसार जरूरी है।

एमसीडी के वकील ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की गई है और यहां तक कि सीलिंग के आदेश भी जारी किए गए हैं।

अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को आगे की सुनवाई के लिए 10 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया जाए।

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