अमरावती, 27 अगस्त आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य के लिए तीन नयी राजधानियों की स्थापना के लिए जरूरी दो नए कानूनों पर यथास्थिति को 21 सितंबर तक बढ़ा दिया।
मुख्य न्यायाधीश जे के माहेश्वरी, न्यायमूर्ति ए वी शेष साई और न्यायमूर्ति एम सत्यनारायण मूर्ति की एक खंडपीठ ने मामले में यथास्थिति बरकरार रखते हुये इसे 21 सितंबर तक बढ़ा दिया। पीठ ने बाद में राजधनी रायतु परिरक्षण समिति और अन्य द्वारा दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई की।
मामले में यथास्थिति का विस्तार होने से राज्य के कार्यकारी राजधानी को विशाखापत्तनम में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए वाई एस जगन मोहन रेड्डी सरकार की उम्मीदों पर फिलहाल विराम लग गया है।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को मामले में उच्च न्यायालय के पहले के आदेशों पर राज्य सरकार को कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।
यह भी पढ़े | JEE Main 2020: कोरोना वायरस के कारण 10 शिफ्ट में होंगी जेईई की परीक्षा.
पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के बजाय अदालत में सुनवाई की कार्यवाही चलाने की इच्छा व्यक्त की।
पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों के साथ इस विषय पर 70 से अधिक याचिकाओं के त्वरित निपटान के लिए दैनिक आधार पर सुनवाई करने की संभावना पर भी चर्चा की।
अदालत ने राज्य सरकार को इस पर जबाव दाखिल करने के लिए 11 सितंबर तक का समय दिया और याचिकाकर्ताओं को अपनी आपत्तियां (अगर कोई हो) दर्ज कराने के लिए 17 सितंबर तक का समय दिया।
इस बीच, बृहस्पतिवार को एक अवमानना याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार विशाखापत्तनम के पास कपुलुपाड़ा गांव में एक अतिथि गृह के निर्माण के लिए काम शुरू करने जा रही है।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि चूंकि अतिथि गृह का निर्माण भी विशाखापत्तनम में कार्यकारी राजधानी बनाने के कदम का एक हिस्सा है, इसलिए यह उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए यथास्थिति के आदेश का उल्लंघन का मामला बनता है।
पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को 10 सितंबर तक इस पर जबाव दाखिल करने का निर्देश दिया।
कृष्ण
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY