नयी दिल्ली, 15 मार्च उच्चतम न्यायालय भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की नियुक्ति केवल कार्यपालिका और प्रधानमंत्री द्वारा करने की मौजूदा प्रक्रिया को गैर संवैधानिक घोषित करने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर 17 मार्च को सुनवाई करेगा।
यह जनहित याचिका एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने दाखिल की है। इसमें न्यायालय से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि कैग की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और प्रधान न्यायाधीश वाली एक स्वतंत्र और तटस्थ नियुक्ति समिति के परामर्श से और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।
इसमें कहा गया है कि कैग की नियुक्ति का निर्देश सूचना आयोगों और केंद्रीय सतर्कता आयोग सहित अन्य निकायों की नियुक्ति के समान होना चाहिए।
इस जनहित याचिका पर सोमवार को न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ सुनवाई करेगी।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि कैग की नियुक्ति का वर्तमान तरीका असंवैधानिक है, क्योंकि यह अनुच्छेद 14 और संविधान की कई बुनियादी विशेषताओं का उल्लंघन है। यह नियुक्ति पूरी तरह कार्यपालिका द्वारा की जाती है, अर्थात प्रधानमंत्री किसी भी व्यक्ति को चुनकर नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति को उसके नाम की सिफारिश करते हैं।
जनहित याचिका में कैग के कामकाज में राजनीतिक और कार्यकारी हस्तक्षेप के कई उदाहरणों का आरोप लगाया गया है।
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