देश की खबरें | पीसीए के एक प्रावधान की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर 20 नवंबर को सुनवाई

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह भ्रष्टाचार-रोधी कानून के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने संबंधी याचिका पर 20 नवंबर को दलीलें सुनेगा, जिसमें भ्रष्टाचार के मामले में किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व मंजूरी अनिवार्य की गई है।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि यह याचिका ‘बहुत महत्वपूर्ण मामले’ से संबंधित है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) में उस संशोधन को चुनौती है, जिसके तहत भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में कोई पूछताछ या जांच, सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती है।’’

उच्चतम न्यायालय ने 26 नवंबर, 2018 को केंद्र को नोटिस जारी कर पीसीए की संशोधित धारा 17ए(1) की वैधता के खिलाफ दाखिल याचिका पर जवाब मांगा था।

भूषण ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि संशोधित धारा के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी तरह की पूछताछ या जांच सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 20 नवंबर तय की।

याचिका में आरोप लगाया गया कि संशोधित धारा के कारण भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ जांच में कटौती हो गई है और यह सरकार द्वारा प्रावधान पेश करने का तीसरा प्रयास है, जिसे शीर्ष अदालत पहले ही दो बार असंवैधानिक करार दे चुकी है।

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