देश की खबरें | बीएचयू के लापता छात्र के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई टली

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक लापता छात्र के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई मंगलवार को 12 अक्टूबर तक के लिए टाल दी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, 23 सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक लापता छात्र के मुद्दे पर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई मंगलवार को 12 अक्टूबर तक के लिए टाल दी।

वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अमित पाठक ने लापता छात्र की तलाश के लिए और मोहलत मांगी जिस पर न्यायमूर्ति प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई टाल दी।

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बीएचयू के छात्र के कथित तौर पर लापता होने के बारे में अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था जिसे अदालत ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार कर सुनवाई शुरू की।

वाराणसी के एसएसपी पाठक ने अदालत को बताया कि लापता छात्र का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है और पुलिस उसका पता लगाने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है। वहीं लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है।

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उल्लेखनीय है कि बीएचयू में बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी को पुलिस ने 12 फरवरी को विश्वविद्यालय के एंफीथिएटर ग्राउंड से हिरासत में लिया था। शिव कुमार के एक सहपाठी ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी थी कि त्रिवेदी मैदान में असामान्य स्थिति में खड़ा है।

इससे पूर्व सुनवाई पर अपर शासकीय अधिवक्ता ने हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताया था कि जो छात्र पुलिस थाने में 12 फरवरी को था, वह अगले दिन वहां से भाग गया। तब से उसके बारे में कोई विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि बाद में पुलिस मानसिक रूप से विक्षिप्त एक व्यक्ति को लेकर आई और पुलिस को संदेह है कि वह त्रिवेदी हो सकता है। इसलिए उसकी पहचान निर्धारित करने के लिए डीएनए और बायोमीट्रिक जांच प्रस्तावित है।

इस हलफनामे पर अदालत ने वाराणसी के एसएसपी को तलब किया। अदालत ने कहा, “हमें यह समझ नहीं आ रहा कि पुलिस के अधिकारी 12 फरवरी और उसके बाद क्या हुआ, इस बारे में तथ्यों से जुड़े सभी विवरण देने के बजाय एक अस्पष्ट हलफनामा दे रहे हैं। इन तथ्यों को जीडी में दर्ज किया जाना चाहिए था।”

अदालत ने वाराणसी के एसएसपी को यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनकी ओर से कोई जिम्मेदार अधिकारी अदालत में उपस्थित रहे जिससे वह अदालत को जांच में ताजा प्रगति से अवगत करा सके।

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