नयी दिल्ली, दो अगस्त महाराष्ट्र और गुजरात में कई दशकों से संचालित चिकित्सा क्षेत्र के डिप्लोमा पाठ्यक्रम सीपीएस को मान्यता नहीं देने के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के फैसले पर असंतोष जताते हुए शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सांसद ने सरकार से राज्यों में संचालित ऐसे और अन्य डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को मान्यता दिए जाने की मांग केंद्र सरकार से की।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने पिछले साल मुंबई के ‘कॉलेज ऑफ फिजीशियन एंड सर्जन’ (सीपीएस) द्वारा संचालित चिकित्सा पीजी पाठ्यक्रम पर विचार करने से इनकार कर दिया।
भाजपा सांसद डॉ संजय जायसवाल ने लोकसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए यह विषय उठाया और कहा कि महाराष्ट्र में सीपीएस पाठ्यक्रम को अमान्य करार दिए जाने से करीब 23 हजार एमबीबीएस चिकित्सक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में विशेषज्ञों के रूप में काम नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात की सरकारें 112 साल से इस पाठ्यक्रम को मान्यता दे रही थीं और जिन छात्रों ने इनमें प्रवेश लिया, वे नीट परीक्षा के माध्यम से इसके लिए पात्र थे।
जायसवाल ने स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से सीपीएस पाठ्यक्रम को मान्यता दिलाने के संबंध में ध्यान देने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘अगर इन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं देंगे तो चिकित्सा के क्षेत्र में एक (श्रेष्ठ) स्तर पर नहीं पहुंच सकते।’’
सांसद ने कहा कि इन चिकित्सकों का तो कोई अपराध नहीं है क्योंकि इन्होंने तो महाराष्ट्र सरकार की काउंसलिंग के बाद प्रवेश लिया था।
उन्होंने एनएमसी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह इस संस्था को लाया गया था, लेकिन यह भी एमसीआई की तरह हो गई है जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
जायसवाल ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध है कि न केवल महाराष्ट्र और गुजरात में इस पाठ्यक्रम को, बल्कि अन्य राज्यों में भी दो साल के ऐसे डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।’
जायसवाल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मातृ रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन और सर्जन की जरूरत रेखांकित करते हुए कहा कि केवल 10 प्रतिशत केंद्रों पर ये चारों विशेषज्ञ मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकारों ने देश में चिकित्सा शिक्षा की अनदेखी की और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने देश में मेडिकल कॉलेज खोलने पर ध्यान नहीं दिया।
जायसवाल ने कहा, ‘‘वहीं, मोदी सरकार ने हर बड़े जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का निर्णय लिया। देश में 22 एम्स और अन्य चिकित्सा संस्थान खुलने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सिफारिश के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक चिकित्सक होना चाहिए और मोदी सरकार के कार्यकाल में इस मापदंड को पार किया जा चुका है।
जायसवाल ने कहा कि बजट में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के लिए 4000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटन कर सरकार ने अपनी प्राथमिकता रेखांकित की है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 में हर राज्य सरकार से अनुरोध किया गया था कि अपने बजट का आठ प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करें, लेकिन पंजाब, कर्नाटक और तेलंगाना में स्वास्थ्य पर सबसे कम खर्च हुआ है जहां विपक्षी दलों की सरकारें हैं।
उन्होंने 2014 में टीकाकरण के लिए शुरू किए गए ‘मिशन इंद्रधनुष’ को स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़े परिवर्तन वाले कार्यक्रमों में से एक बताया।
भाजपा की डी पुरंदेश्वरी ने कहा कि मोदी सरकार में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए अनेक काम हुए हैं और आगे भी स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूती प्रदान करने की गुंजाइश है।
उन्होंने भी सीएचसी और पीएचसी में सुविधाओं तथा चिकित्सकों की कमी का उल्लेख करते हुए सरकार से इस ओर ध्यान देने की मांग की।
पुरंदेश्वरी ने बजट में मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवंटन 63 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 90 करोड़ रुपये किए जाने की सराहना की और कहा कि आगे इस आवंटन को और बढ़ाया जा सकता है।
भाजपा सांसद ने स्वास्थ्य बजट में अनुसंधान आवंटन में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे निपाह वायरस के संक्रमण जैसी नई-नई बीमारियों से निपटने में मदद मिलेगी।
शिवसेना के नरेश गणपत म्हास्के ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से देश के बड़े वर्ग को इलाज कराने में राहत दी है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सदस्य वीणा देवी ने बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित एक मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देने की मांग की।
उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वैशाली के कुछ गांवों में कैंसर का प्रकोप बढ़ने की बात कही और सरकार से इन गांवों में जांच कराने के लिए एक केंद्रीय दल भेजने का अनुरोध किया।
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