भोपाल, 22 जून माल एवं सेवाकर (जीएसटी) खुफिया अधिकारियों ने इंदौर स्थित सिगरेट बनाने वाली कंपनी की 105 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया है। कंपनी ने पिछले एक साल के दौरान यह कर चोरी की है। सोमवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में यह कहा गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि जीएसटी आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई) के अधिकारी ने यहां पिछले सप्ताह कंपनी के परिसर में जांच पड़ताल की जिसमें यह पता चला कि कारखाने के पिछले हिस्से में गुप्त रास्ता बनाया गया है जिसके जरिये बिना हिसाब- किताब रखे कच्चा माल लाया जाता है और तैयार माल बाहर भेजा जाता है।
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जांच एजेंसी ने कहा कि यह भी पता चला है कि मशीनों को चलाने के लिये जनरेटर सेटों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि उत्पादन को कम दिखाया जा सके।
डीजीजीआई, भोपाल के अतिरिक्त महानिदेशक द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘डीजीजीआई द्वारा की गई जांच में एक बड़ी कर चोरी पकड़ी गई। यह चोरी अप्रैल 2019 से लेकर मई 2020 की अवधि के दौरान ही 105 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।’’
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विज्ञप्ति में कहा गया है कि विनिर्माण इकाई द्वारा इस प्रकार की कर चोरी पूर्ववर्ती केन्द्रीय उत्पाद शुल्क लागू रहने के दौरान और उसके बाद जीएसटी लागू होने की अवधि के दौरान किये जाने का भी संदेह है।
डीजीजीआई ने कहा है, ‘‘इस प्रकार कुल कर चोरी के बारे में जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा। यह कई गुणा अधिक होने की आशंका है।’’
मामले के मास्टरमाइंड द्वारा किये गये लेनदेन की वित्तीय जांच के बाद पता चला कि उसने एक मीडिया हाउस खोला जिसमें बताया गया कि उसके समाचार पत्र की कुल प्रसार संख्या 1.2 से डेढ लाख प्रति तक है जबकि वास्तव में उसकी सर्कुलेशन मात्र चार हजार से छह हजार प्रति प्रतिदिन ही थी। मास्टरमांइड को हाल ही में डीजीजीआई ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है।
वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘इस प्रकार पान मसाला, सिगरेट कारोबार से होने वाली अवैध कमाई को इस पूरे मामले के कर्ताधर्ता ने समाचार पत्र की अधिक बिक्री भारी मात्रा में अवैध नकदी की हेराफेरा की। उसने समाचार पत्र में विज्ञापन के जरिये झूठी आय भी दिखाई।’’
डीजीजीआई ने कहा कि फैक्टरी के निरीक्षक, लेखाकार और अन्य स्टाफ से पूछताछ करने के बाद ऐसा अनुमान लगाया गया है कि पिछले कई सालों से उत्पादन के पांच प्रतिशत से भी कम को ही लेखा जोखा में दिखाया जाता रहा है।
इसमें कहा गया है कि जिस उत्पादन का हिसाब किताब रखा गया उसमें भी जो प्रमुख खरीदार बताया गया है वह भी फर्जी पाया गया।
वक्तव्य के अनुसार 19 जून को डीजीजीआई अधिकारी एक गैर कानूनी, बिना पंजीकरण वाले गोदाम का पता लगाने में सफल रहे जिसका इस्तेमाल कर चोरी के पैकिंग सामान को छिपाने के लिये किया जाता रहा है। यह पैकिंग सामान सिगरेट ब्रांड के10 और ए10 के लिये इस्तेमाल किया जाता है।
इन दोनों ब्रांड के पैकिंग सामग्री की आपूर्तिकर्ताओं ने हर महीने 1,500 कार्टन की बिना हिसाब किताब रखे आपूर्ति किये जाने की बात स्वीकार की है।
डीजीजीआई भोपाल के अधिकारियों ने ‘आपरेशन कर्क’ के तहत 9 से 12 जून के बीच कई पान मसाला, तंबाकू डीलरों और वितरकों के परिसरों में जांच अभियान चलाया। इसमें तलाशी अभियान में बिना जीएसटी भुगतान के छुपाकर रखे गये पान मसाला, तंबाकू पैकेट जब्त किये गये जिसमें करीब 400 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का अनुमान है।
इस पूरे मामले में एक मास्टरमाइंड और वित्तीय लाभार्थी को 15 जून को मुंबई से गिरफ्तार किया गया। इसमें आगे की जांच से पता चला है कि वह इंदौर स्थित एक कारखाने में सिगरेट के उत्पादन और आपूर्ति में शामिल है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह संकेत मिलता है कि इस कारखाने से पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान केवल 2.09 करोड़ रुपये और 1.46 करोड़ रुपये का ही जीएसटी का भुगतान किया गया।
वक्तव्य में कहा गया है कि विभिन्न आंकड़ों के विश्लेषण और जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर पिछले सप्ताह इस कारखाने से जुड़े पांच अन्य परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया।
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