(तस्वीरों के साथ)
उज्जैन (मप्र), नौ अक्टूबर दो भव्य प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थरों से बने जटिल नक्काशीदार 108 अलंकृत स्तंभों की एक आलीशान स्तम्भावली, फव्वारों और शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 से अधिक भित्ति-चित्रों की एक श्रृंखला मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में नवनिर्मित 'महाकाल लोक' की शोभा बढ़ाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को उज्जैन में 856 करोड़ रुपये की महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर विकास परियोजना के पहले चरण की शुरुआत करेंगे।
उज्जैन में बना 900 मीटर से अधिक लंबा कॉरिडोर- 'महाकाल लोक' - भारत में अब तक निर्मित ऐसे सबसे बड़े गलियारों में से एक है।
यह कॉरिडोर पुरानी रुद्रसागर झील के पास है, जिसे प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर के आसपास पुनर्विकास परियोजना के हिस्से के रूप में भी पुनर्जीवित किया गया है।
महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है, जहां देश के विभिन्न इलाकों से लोग सालों भर दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने आते हैं।
दो राजसी प्रवेश द्वार- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार - थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कॉरिडोर के शुरुआती बिंदु के पास बनाए गए हैं, जो प्राचीन मंदिर के प्रवेश द्वार तक जाते हैं और रास्ते भर सौंदर्य के दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
इस परियोजना की शुरुआत से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि राजस्थान में बंसी पहाड़पुर क्षेत्र से प्राप्त बलुआ पत्थरों का उपयोग उन संरचनाओं के निर्माण के लिए किया गया है जो इस कॉरिडोर की शोभा बढ़ाते हैं।
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