देश की खबरें | चीन के साथ सीमा पर संकट की मुख्य वजह सरकार का कुप्रबंधन: सोनिया
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नयी दिल्ली, 23 जून कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे गतिरोध को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि इस संकट तथा कोरोना महामारी एवं अर्थव्यवस्था से जुड़े संकट का मुख्य कारण नरेंद्र मोदी सरकार का कुप्रबंधन एवं उसके द्वारा अपनाई गई नीतियां हैं।
सोनिया ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में यह दावा दावा भी किया कि कोरोना संकट और इसके बाद की स्थिति से निपटने में सरकार पूरी तरह विफल रही है और इन सबके बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि कर लोगों की पीड़ा बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक भयावह आर्थिक संकट, एक भयंकर महामारी और अब चीन के साथ सीमाओं पर एक बड़े संकट का सामना कर रहा है। भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार का कुप्रबंधन और गलत नीतियां इन संकटों का एक प्रमुख कारक हैं।’’
उनके मुताबिक, एक तरफ व्यापक पीड़ा और भय का माहौल है वहीं देश की सुरक्षा और भूभागीय अखंडता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
कांग्रेस की शीर्ष नेता ने कहा, ‘‘ इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अप्रैल-मई, 2020 से लेकर अब तक, चीनी सेना ने पेगोंग सो (झील) क्षेत्र और गलवान घाटी, लद्दाख में हमारी सीमा में घुसपैठ की है।’’
उनके मुताबिक, घुसपैठ की ख़बरें और जानकारी 5 मई, 2020 को आई। समाधान के बजाय, स्थिति तेजी से बिगड़ती गई और 15-16 जून को हिंसक झड़पें हुईं। 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए, 85 घायल हुए और 10 'लापता' हो गए जब तक कि उन्हें वापस नहीं किया गया।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान ने पूरे देश को झकझोर दिया जब उन्होंने कहा कि "किसी ने भी लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ नहीं की"।
उन्होंने कहा, ‘‘ राष्ट्रीय सुरक्षा और भूभागीय अखंडता के मामलों पर पूरा राष्ट्र हमेशा एक साथ खड़ा है। कांग्रेस ने सबसे पहले आगे बढ़कर हमारी सेना और सरकार को अपना पूरा समर्थन देने के घोषणा की। हालांकि, लोगों में यह भावना है कि सरकार स्थिति को संभालने में गंभीर रूप से विफल हुई है।’’
सोनिया ने कहा, ‘‘ हम उम्मीद करते हैं कि हमारी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सरकार के द्वारा उठाये जाने वाला हर क़दम परिपक्व कूटनीति व मजबूत नेतृत्व की भावना से निर्देशित होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शांति और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पहले जैसी यथास्थिति की बहाली हमारे राष्ट्रीय हित में एकमात्र मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए। हम स्थिति पर लगातार नजर बनाये रखेंगे।
कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बाद पैदा हुए आर्थिक हालात का उल्लेख करते हुए सोनिया ने कहा, ‘‘ अब आर्थिक संकट और भी गहरा गया है। मोदी सरकार हर सही सलाह सुनने से इनकार करती है। वक़्त की मांग है कि बड़े पैमाने पर सरकारी खजाने से मदद, ग़रीबों के हाथों में सीधे पैसा पहुंचाना, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यमों की रक्षा करना और मांग को बढ़ाना व प्रोत्साहित करना चाहिए।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की सीधी मदद करने के बजाय सरकार ने एक खोखले वित्तीय पैकेज की घोषणा की, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत से कम ही राजकोषीय प्रोत्साहन था।
सोनिया ने कहा, ‘‘वैश्विक बाजार में जब कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हों, ऐसे समय में सरकार ने लगातार 17 दिनों तक निर्दयतापूर्वक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि करके देश के लोगों को पहले से लगी चोट और उसके दर्द को बढ़ाया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे डर है कि बेरोज़गारी और बढ़ेगी, देशवासियों की आय कम होगी, मजदूरी गिरेगी व निवेश और कम होगा। स्थिति में सुधार में लंबा समय लग सकता है, और वह भी तब, जब सरकार अपनी व्यवस्था को ठीक करे और ठोस आर्थिक नीतियों को अपनाए।’’
कांग्रेस की शीर्ष नेता ने कहा, ‘‘भारत में महामारी फरवरी में आयी। कांग्रेस ने सरकार को अपना पूरा सहयोग देते हुए लॉकडाउन के पहले चरण का समर्थन किया। शुरूआती हफ्तों के भीतर, यह स्पष्ट हो गया था कि सरकार लॉकडाउन से होने वाली समस्याओं का प्रबंधन करने के लिए बिलकुल तैयार नहीं थी।’’
उन्होंने कहा कि सरकार की तैयारी नहीं होने का परिणाम वर्ष 1947-48 के बाद सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी के रूप में सामने आया। करोड़ों प्रवासी मजदूर, दैनिक वेतन भोगी और स्व-नियोजित कर्मचारियों की रोजी रोटी तबाह हो गयी। 13 करोड़ नौकरियों के ख़त्म हो जाने का अनुमान लगाया गया है। करोड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम शायद हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, जिन्होंने सारी शक्तियों को अपने हाथों में केंद्रीकृत कर लिया था, उनके आश्वासनों के विपरीत महामारी लगातार बढ़ रही है। केंद्र ने अपनी सारी जिम्मेदारियां राज्य सरकारों पर डाल पल्ला झाड़ लिया, लेकिन उन्हें कोई अतिरिक्त वित्तीय सहायता नहीं दी गयी है।’’
सोनिया ने दावा किया कि महामारी के कुप्रबंधन को नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे विनाशकारी विफलताओं में से एक के रूप में दर्ज किया जाएगा।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 23, 2020 02:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

